रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा (काकोरी के अमर शहीद की जेल डायरी व आत्मकथा)
Autobiography of Ram Prasad Bismil
पं. रामप्रसाद 'बिस्मिल' (सम्पादक: बनारसीदास चतुर्वेदी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआत्म-चरित्र 21
को कत्ल किया जाए, उनकी महिलाओं की बेइज्जती हो, आदि। किंतु यह सब
स्वप्न है”। “यह सब स्वप्न है” इन्हीं शब्दों को पढ़कर डिप्टी कमिश्नर कहता
कि हम तुम्हारा कुछ नहीं कर सकते।
स्वामी सोमदेव भ्रमण करते हुए बंबई पहुँचे। वहाँ पर आपके उपदेशों को
सुनकर जनता पर बड़ा प्रभाव पड़ा। एक व्यक्ति, जो श्री अबुल कलाम आजाद
के बड़े भाई थे, आपका व्याख्यान सुनकर मोहित हो गए। वह आपको अपने घर
ले गए। इस समय तक आप गेरुआ कपड़ा नहीं पहनते थे। केवल एक लुंगी
और कुर्ता पहनते थे, और साफा बाँधते थे। श्री अबुल कलाम आजाद के पूर्वज
अरब के निवासी थे। आपके पिता के बंबई में बहुत से प्रशंसक थे और कथा
की तरह कुछ धार्मिक ग्रंथ पढ़ने पर हजारों रुपये चढ़ावे में आया करते थे। वह
सज्जन इतने मोहित हो गए कि उन्होंने धार्मिक कथाओं का पाठ करने के लिए
जाना ही छोड़ दिया। वह दिन-रात आपके पास ही बैठे रहते। जब आप उनसे
कहीं जाने को कहते तो वह रोने लगते और कहते कि मैं तो आपके आत्मिक
ज्ञान (आत्मा से संबंधित जानकारी) के उपदेशों पर मोहित हूँ। मुझे संसार में
किसी वस्तु की इच्छा नहीं। आपने एक दिन नाराज होकर उनके धीरे से चपत
मार दी जिससे वे दिन-भर रोते रहे। उनको घर वालों तथा शिष्यों ने बहुत
समझाया किन्तु वह धार्मिक कथा कहने न जाते। यह देखकर उनके शिष्यों को
बड़ा क्रोध आया कि हमारे धर्मगुरु एक काफिर के चक्कर में फँस गए हैं। एक
संध्या को स्वामी जी अकेले समुद्र के तट पर भ्रमण करने गए थे कि कई मुरीद
मकान पर बंदूक लेकर स्वामी जी को मार डालने के लिए आए। यह समाचार
जानकर उन्होंने स्वामीजी के प्राणों का भय देख स्वामीजी से बंबई छोड़ देने की
प्रार्थना की। प्रातःकाल एक स्टेशन पर स्वामीजी को तार मिला कि आपके प्रेमी
श्री अबुल कलाम आजाद के भाई साहब ने आत्महत्या कर ली। तार पाकर
आपको बड़ा क्लेश हुआ। जिस समय आपको इन बातों का स्मरण हो आता था
तो बड़े दुखी होते थे। मैं एक संध्या के समय आपके निकट बैठा था, अंधेरा