रामार्चन पद्धति (जगद्गुरु रामानन्दाचार्य - सन्त कबीर व रविदास के दीक्षा-गुरु प्रणीत मूल ग्रन्थ)
Ramarchana Paddhati of Jagadguru Ramanandacharya
जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंततस्तथैव ॐ विघ्नेशाय नमः अ० । ॐ वाण्यै नमः अ० । ॐ दुर्गायै नमः
अ० । ॐ क्षेत्रपालाय नमः अ० । ॐ सूर्याय नमः अ० । ॐ चन्द्राय नमः अ० ।
ॐ नारायणाय नमः अ० । ॐ नारसिंहाय नमः अ० । ॐ वासुदेवाय नमः अ० ।
ॐ वाराहाय नमः अ० । इत्यङ्गदेवान् सम्पूज्य ॐ श्रीसीतायै नमः अ० । ॐ
श्रीलक्ष्मणाय नमः अ० । ॐ श्रीहनुमते नमः अ० । ॐ श्रीभरताय नमः अ० । ॐ
श्रीशत्रुघ्नाय नमः अ० । ॐ श्रीविभीषणाय नमः अ० । ॐ श्रीसुग्रीवाय नमः अ० ।
ॐ श्रीअङ्गदाय नमः अ० । ॐ श्री जाम्बवन्ताय नमः अ० । ॐ श्रीप्रणवाय नमः
अ० । इत्यङ्गमन्त्रान् प्रपूजयेत् ।
पूर्वोक्त क्रम से द्वारपालादिको की पूजा के बाद निम्न प्रकार से भगवान के दश अग
देवताओ को पूजे ॐ विघ्नेशाय नम इस मन्त्र को बोलकर अर्ध्यादि से विघ्नेश की पूजा करे।
ॐ वाण्यै नम इस मन्त्र को बोलकर वाणी की अर्ध्यादि से पूजे । ॐ दुर्गायै नम इस मन्त्र
से दुर्गाजी की अर्ध्यादि से पूजे । ॐ क्षेत्रपालाय नम इस मन्त्र से अर्ध्यादि द्वारा क्षेत्रपालों
की पूजा करे । ॐ सूर्याय नम इस मन्त्र से सूर्य की अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ चन्द्राय
नम इस मन्त्र से चन्द्र की अर्ध्यादि से पूजा करे ॐ नारायणाय नम इस मन्त्र को बोलकर
नारायण को अर्ध्यादि से पूजे ॐ नारसिंहाय नम इस मन्त्र से अर्ध्यादि द्वारा नारसिंह की पूजा
करे । ॐ वासुदेवाय नम इस मन्त्र से वासुदेव की अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ वाराहाय नम
इस मन्त्र से अर्ध्यादि से वाराह की पूजा करे । इस प्रकार अग देवताओ की पूजा करने के
बाद श्रीरामजी के अग मन्त्रो की निम्न रूप से पूजा करे-ॐ श्रीसीतायै नम इस मन्त्र को
बोलकर श्रीसीताजी की अर्ध्यादि सभी सामग्री से पूजा करे । तथैव ॐ लक्ष्मणाय नम इस
मन्त्र से श्रीलक्ष्मणजी की अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ श्रीहनुमते नम इस मन्त्र से अर्ध्यादि
द्वारा श्रीहनुमानजी की पूजा करे । ॐ श्रीभरताय नम इस मन्त्र से श्रीभरतजी की अर्ध्यादि से
पूजा करे । ॐ श्रीशत्रुघ्नाय नम इस मन्त्र से अर्ध्यादि द्वारा श्रीशत्रुघ्नजी की पूजा करे । ॐ
श्रीविभीषणाय नम इस मन्त्र से अर्ध्यादि से श्रीविभीषणजी की पूजा करे । ॐ श्रीसुग्रीवाय नम
इस मन्त्रके द्वारा अर्ध्यादि से श्रीसुग्रीवजी की पूजा करे । ॐ अगदाय नम इस मन्त्र से अगद
जी की अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ श्रीजाम्बवन्ताय नम इस मन्त्र से श्रीजाम्बवन्तजी की
अर्ध्यादि से पूजा करके ॐ श्रीप्रणवाय नम इस मन्त्र से प्रणव की अर्ध्यादि से अच्छी प्रकार
प्रेम भावना युक्त होकर पूजा करे ।
“अङ्गान् विना रामो विघ्नकरो भवति” ऐसा श्रीरामोपनिषद् मे लिखा है अत सर्वेश्वर श्री
रामजी के पूर्वोक्त विघ्नेश आदि दश अग देवता तथा श्रीसीता आदि दश अग मन्त्रो की पूजा
सावधानी से सभक्तिभाव करना चाहिये । इसी ओर आचार्य श्रीने सकेत-प्रपूजयेत लिखकर किया
है । क्योकि साग पूजा के बिना पूजा सफल नही होती है ।
ॐ सर्वे भ्यो भगवद्गणाधिपेभ्यो नमः अ० । ॐ सर्वे भ्योभगवत्पार्षदेभ्यो
नमः अ० । ॐ सर्वे भ्यो भगवत्परिजनपरिचरेभ्यो नमः अ० । ॐ नीत्यै नमः अ० ।