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सर्वकोश
रामार्चन पद्धति (जगद्गुरु रामानन्दाचार्य - सन्त कबीर व रविदास के दीक्षा-गुरु प्रणीत मूल ग्रन्थ)

रामार्चन पद्धति (जगद्गुरु रामानन्दाचार्य - सन्त कबीर व रविदास के दीक्षा-गुरु प्रणीत मूल ग्रन्थ)

Ramarchana Paddhati of Jagadguru Ramanandacharya

जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished26 पृष्ठ

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८१६ गङ्गा संहिता
दक्षिणकुण्डलाय मकरात्मने नमः अ० । ॐ वामकुण्डलाय मकरात्मने नमः अ० ।
ॐ वैजयन्तीमालायै श्रीतुलस्यै नमः अ० । ॐ श्री वत्साय श्रीनिवासाय नमः अ० ।
ॐ कौस्तुभायरत्नाधिपतये नमः अ० । ॐ काञ्चीगुणोज्ज्वलायदिब्यपीताम्बराय
नमः अ० । ॐ सर्वेभ्योभगवद्दिव्यविभूषणेभ्यो नमः अ० । इति भगवद्भूषणानि
अर्ध्यादिभिरभ्यर्चेत् ।
पूर्वोक्त प्रकार से भगवान की पूजा सम्पादन करने के वाद अर्ध्यादिपात्रो मे वचे हुये
जल से श्री श्रियै नम इस मन्त्र को बोलकर श्रीदेवी की अर्घ्य आदि सभी पदार्थों से पूजा करे।
तथैव लीं लीलायै नम इस मन्त्र को बोलकर लीलादेवी की और भू भू+यै नम इस मन्त्र
को बोल कर भूदेवी की सभी अर्ध्यादि सामग्री से पूजा करे । पुन ॐ किरीटाय मुकुटाधि
पतये नम इस मन्त्र को बोलकर अर्घ्य पाद्य आचमनीय स्थानीय गन्ध पुष्प आदि से किरीट
मुकुट की पूजा करने के वाद ॐ दक्षिण कुण्डलाय मकरात्मने नम इस मन्त्र को वोलकर पहले
के समानही अर्ध्यादि सामग्री से दक्षिण कुण्डल की पूजा करके ॐ वामकुण्डलाय मक्रात्मने नम
इस मन्त्र को बोलकर पूर्व के ही तरहसे वाम कुण्डल की पूजा करे । तब ॐ वैजयन्तीमाल्यै
श्रीतुलस्यै नम इस मन्त्र को बोल कर अर्ध्यादि सभी वस्तुओ से वैजयन्ती माला की पूजा करनेके
वाद ॐ श्रीवत्साय श्रीनिवासाय नम इस मन्त्र को वोलकर पूर्व के समान ही सभी अर्ध्यादि से
श्रीरामचन्द्रजी के वक्षस्थल मे स्थित सर्वेश्वरी श्रीसीताजी के निवास स्थान भूत श्रीवत्स की पूजा
करे । इसके बाद ॐ कौस्तुभाय रत्नाधिपतये नम इस मन्त्र को बोलकर पहले के समान ही
अर्ध्यादि समस्त सामग्री से श्रीरामजी का भूषण कौस्तुभमणि की पूजा सम्पादन करे । अनन्तर
ॐ काञ्चीगुणोज्ज्वलाय दिव्यपीताम्बराय नम इस मन्त्र को बोलकर पूर्व के ही समान अर्ध्यादि सभी
वस्तुओं से श्रीरामजी के दिव्य परिधान पीताम्बर की पूजा करे । इसके बाद ॐ सर्वेभ्यो भगवद्दि
व्यविभूषणेभ्यो नम इस मन्त्र को बोलकर पूर्व के ही तरह से समस्त अर्ध्यादि द्रव्यों से श्रीराम
चन्द्रजी के समस्त दिव्य आभूषणों की एक ही साथ मे पूजा करे ।
ततोऽर्ध्याद्येकैकपात्रस्थ जलेन क्रमशः ॐ सुदर्शनाय हेतिराजाय नमः अ० ।
ॐ पाञ्चजन्याय शङ्खाधिपतये नमः अ० । ॐ कौमोदक्यै गदाधिपतये नमः अ० ।
ॐ नन्दकाय खङ्गाधिपतये नमः अ० । ॐ शार्ङ्गाय चापाधिपतये नमः अ० ।
इति भगवतो दिव्यायुधानि अर्ध्यादिभिरभ्यर्चेत् ।
पूर्वोक्त क्रम से भगवान् के दिव्य भूषणो के पूजन करने के बाद उन्ही अर्घ्य आदि पात्रों
के जलसे ॐ सुदर्शनाय हेतिराजाय नम इस मन्त्र को बोलकर अर्घ्य पाद्य आदि सभी
सामग्री से भगवान् के दिव्य आयुध सुदर्शन चक्रकी पूजा करे । इसी प्रकार से ॐ पाञ्चजन्याय
शङ्खाधिपतये नम इस मन्त्र को बोलकर अर्ध्यादि से पाञ्चजन्य शंख की पूजा करे । पुन ॐ
कौमोदक्यै गदाधिपतये नम इस मन्त्र को बोलकर अर्ध्यादि से गदाकी पूजा करने के बाद ॐ
नन्दकाय खङ्गाधिपतये नम इस मन्त्र को बोलकर खड्ग की अर्ध्यादि से पूजा करे पुन ॐ
शार्ङ्गायचापाधिपतये नम इस मन्त्र को बोलकर भगवान् के दिव्य आयुध धनुषबाण की अर्ध्यादि
से पूजा करे ।