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सर्वकोश
रामार्चन पद्धति (जगद्गुरु रामानन्दाचार्य - सन्त कबीर व रविदास के दीक्षा-गुरु प्रणीत मूल ग्रन्थ)

रामार्चन पद्धति (जगद्गुरु रामानन्दाचार्य - सन्त कबीर व रविदास के दीक्षा-गुरु प्रणीत मूल ग्रन्थ)

Ramarchana Paddhati of Jagadguru Ramanandacharya

जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य द्वारा

DevanagariHindipublished26 पृष्ठ

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पृष्ठ 11

पीठवाहक के ऊपर दिव्ययोग पीठकी अर्घ्य आदि से पूजा करे । ॐ दिव्ययोगपर्यङ्काय नम ऐसा
बोलकर योगपीठ पर दिव्ययोग पर्यङ्क की अर्घ्य आदि से पूजा करे । ॐ सहस्रफगाशोभिताय
नागराजाय नम ऐसा बोलकर पर्यङ्क के ऊपर सहस्र फग से शोभित नागराज की अ र्ये आदि
से पूजा करे । ॐ भगवत्पाद पीठाय नम ऐसा बोलकर भगवान् के सामने भगवान् के पादुका
पीठ की अर्घ्य आदि से पूजा करे । ॐ भगवत्पादुकाभ्या नम ऐसा बोलकर पादुका पीठ के
ऊपर भगवान के दिव्य पादुका खडाउ की अर्घ्य आदि से पूजा करे ।
अथ तादृशाष्टदलपद्मस्थपर्यङ्कस्थितानन्तोपरि-
प्रपन्नाभीष्टसन्दोहश्रीराम ? करुणानिधे ?।
शिवशेषाद्यविज्ञेयाशेषमाहात्म्य राघव ? ।१।
तादृश्या सीतयाऽऽगच्छ लक्ष्मणेन सह प्रभो ? ।
आज्ञां क्रियस्व दासस्य प्रपन्नस्यार्चनाय मे ।२।
इति श्रीसीतालक्ष्मणसहितमप्रमेयकृपारत्नाकर भगवन्तं साङ्गं सोयुधं सपरि-
वारं सवाहनं स्वशक्तियुक्त श्री रामचन्द्रमावाह्य पुष्पाञ्जलि च तस्मै प्रदाय पूर्वस्था-
पितार्घ्यपात्रादुद्धरण्यार्घ्यजलमादाय ॐ श्रीसीतालक्ष्मणसमेतायाप्रमेयकृपा रत्ना-
कराय भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः, मध्ये 'रां रामाय नमः' वामे 'श्रीसीतायै स्वाहा'
दक्षिणे 'लं लक्ष्मणाय नमः' इति तत्तन्मन्त्रैः पृथक् पृथग्वा अर्घ्यं समर्पयामी त्युक्त्वा
भगवतो दक्षिणहस्त प्रोक्षन्निव विभाव्य तज्जलं पतनपात्रे प्रक्षिपेत् ।
पूर्व कथित विधान से भगवान् के पादुकान्त पूजा होजाने के बाद पहले वर्णित अष्टदल
कमल मे स्थित अनन्त के ऊपर निम्न रूप से सपरिकर सर्वेश्वर श्रीरामचन्द्रजी का आवाहन करे
शरण मे आये हुये सभी जनो के इच्छित पदार्थ को देने वाले हे करुणा के खजाने सर्वेश्वर
श्रीरामजी ? शिव शेषनाग सर्वदेव समूह सरस्वती प्रभृति से सर्व प्रयत्न करने पर भी आप का
सम्पूर्ण माहत्म्य नही जाना जा सका ऐसे अनन्त माहत्म्य शाली रघुकुल श्रेष्ठ हे श्रीराघवजी ?
सर्वसमर्थ प्रभु श्रीरामजी ? आप से अभिन्न स्वरूपो नित्य सहचरी सर्वेश्वरी श्रीसीताजी
तथा सर्व जगत् के आधार श्रीलक्ष्मणजी के साथ पधारे तथा आपके शरण मे आये आपका
नित्य किंकर मुझे आपकी पूजा करने के लिये आज्ञा प्रदान करे । इस प्रकार प्रार्थना पूर्वक
सर्वेश्वरी श्रीसीताजी तथा श्रीलक्ष्मणजी के साथ अप्रमेय अमित कृपा के समुद्र सर्वेश्वर श्रीरा-
मचन्द्रजी को आयुध-दिव्यास्त्र धनुप बाणादि सपरिवार बाहन अनन्तानन्त अपनी शक्तियो के
साथ श्रीरामचन्द्रजी को आवाहन करके पुष्पाञ्जलि श्रीचरणो मे समर्पण करके पहले से स्थापित
अर्घ्यपात्र से दक्षिणावर्तशंख या आचमनी से अर्घ्य जल लेकर-ॐ श्रीसीता लक्ष्मण समेताया
प्रमेय कृपा रत्नोकराय भगवते श्रीरामचन्द्राय नम इस मन्त्र को बोलकर श्रीरामजी का दाहिना हाथ
प्रक्षालन की भावना से अर्घ्यं समर्पयामि ऐसा कहते हुये हाथ मे लिया अर्घ्य जल पतनपात्र
योनी तरभाणीं मे गिरादे । अनन्तर पाद्य आदि यथा मिलित पूजा द्रव्यों का नाम लेकर सभी
वस्तुओं से पूर्व क्रम से ही पूजा करे । अथवा दिव्यासन के मध्यभाग मे-रा रामाय नमः, इस