रामार्चन पद्धति (जगद्गुरु रामानन्दाचार्य - सन्त कबीर व रविदास के दीक्षा-गुरु प्रणीत मूल ग्रन्थ)
Ramarchana Paddhati of Jagadguru Ramanandacharya
जगद्गुरु स्वामी रामानन्दाचार्य द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८१२ गङ्गा सहिता
की सर्वोपचार द्रव्यो से पूजा करे । पुन अनन्त के ऊपर मे ॐ अष्टदल पद्माय नम ऐसा
बोलकर अष्टदल कमल की पूजा करे । ॐ स सूर्याय नम ऐसा बोलकर अष्टदल कमल के दलों
-पत्तो पर सूर्य मण्डल की पूजा करे । ॐ स सोममण्डलाय नम ऐसा बोलकर कमल के केसरोँ
मे चन्द्रमण्डल की पूजा करे । ॐ र वह्निमण्डलाय नम ऐसा बोलकर अष्टदलकमल के कर्णिका
मे अग्नि मण्डल की पूजा करे ।
इति मण्डलत्रयं ध्यात्वा पद्मस्य पूर्वपार्श्वदले ॐ विमलायै चामरहस्तायै नमः
इति तस्यै अ० । पद्मस्याग्निकोणे ॐ उत्कर्षिण्यै चामरहस्तायै नमः इति अ० । पद्मस्य
दक्षिणदले ॐ ज्ञानरूपायै चामरहस्तायै नमः अ० । पद्मस्य नैऋत्यदले ॐ क्रियायै
चामरहस्तायै नमः अ० । पद्मस्य पश्चिमदले ॐ योगायै चामरहस्तायै नमः अ० ।
पद्मस्य वायव्यदले ॐ सत्यायै चामरहस्तायै नमः अ० । पद्मस्योत्तरदले ॐ प्रह्वयै
चामरहस्तायै नमः अ० । पद्मस्यैशानदले ॐ ऐशानायै चामरहस्तायै नमः अ० ।
पूर्वोक्त प्रकार से अष्टदल कमल मे तीनो मण्डल का शान्तचित्त से ध्यानकर यथोपचार पूजा
करके ॐ विमलायै चामरहस्तायै नम इस मन्त्रको बोलकर कमल के पूर्वभाग के दल मे हाथ
मे चंवर ली हुई विमलाजी की अर्ध्यादि से पूजा करे । तथैव ॐ उत्कर्षिण्यै चामरहस्तायै नम
को बोलकर कमल के अग्नि कोण के दल मे चंवर हस्ता उत्कर्षिणी की अर्ध्यादि से पूजा करे ।
ॐ ज्ञानरूपायै चामरहस्तायै नम ऐसा बोलकर कमल के दक्षिणदल मे चंवर ली हुई ज्ञानरूपा की
अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ क्रियायै चामरहस्तायै नम ऐसा बोलकर कमल के नैऋत्यकोण के
दल मे हाथ मे चंवर ली हुई क्रिया शक्ति की अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ योगायै चामरहस्तायै
नम ऐसा बोलकर कमल के पश्चिम दल मे हाथ मे चंवर ली हुई योगशक्ति की अर्ध्यादि से पूजा
करे । ॐ सत्यायै चामरहस्तायै नम ऐसा बोलकर कमल के वायव्यकोणवाले दल मे हाथ मे चंवर
ली हुई सत्यास्वरूपा शक्ति की अर्ध्यादि से पूजा करे । ॐ प्रह्व्यैचामर हस्तायै नम ऐसा बोलकर
कमल के उत्तर तरफ के दल मे हाथ मे चंवर ली हुई प्रह्वीनामक शक्ति की अर्ध्यादि से पूजा
करे । ॐ ऐशानायै चामरहस्तायै नम ऐसा बोलकर कमल के ईशान वाले दल मे हाथ मे चंवर
ली हुई ऐशानी रूपा शक्ति की अर्ध्यादि से पूजा करे । अनन्तर-
भगवतोऽग्रे कर्णिकायाः पूर्वभागे ॐ अनुग्रहायै नमः अ० । पद्मस्य कर्णि-
कायां ॐ जगत्प्रकृतयेदिव्ययोगपीठवाहकाय नमः अ० । दिव्ययोगपीठवाहकोपरि
ॐ दिव्ययोगपीठाय नमः अ० । योगपीठे ॐ दिव्ययोगपर्यङ्काय नमः अ० ।
पर्यङ्कोपरि ॐ सहस्रफणाशोभिताय नागराजाय नमः अ० । पुरो ॐ भगवत्पादपीठाय
नमः अ० । तदुपरि ॐ भगवत्पादुकाभ्यां नमः अ० ।
ॐ अनुग्रहायै नम इस मन्त्र को बोलकर भगवान् श्रीरामजी के आगे अष्टदल कमल की
कर्णिका के पूर्वदिशा में अनुग्रहा रूपा शक्ति की अर्घ्य आदि सर्वोपचार द्रव्यों से पूजा करे ।
ॐ जगत्प्रकृतये दिव्ययोगपीठवाहकाय नम ऐसा बोलकर अष्टदल कमल के कर्णिका मे दिव्ययोग-
पीठ वाहक की अर्घ्य आदि से पूजा करे । ॐ दिव्ययोगपीठाय नम ऐसा बोलकर दिव्ययोग