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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 269 में से

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पृष्ठ 82

( ७६ ) रामचन्द्रिका-सटीक ।

नहीं है जननीको वयजनाइ या जनायो कि तुमने ऐसे स्त्रीवधादि पराक्रम
करचौहैं अथवा गुरुदोषीजनायो ॥ ३६ ॥
मू०-परशुराम-विजयछन्द ॥ लक्ष्मणकेपुरिखान कियो
पुरुषारथसोनकह्योपरई । वेषबनाइकियोबनितानकोदेखत
केशव ह्योहरई । क्रूरकुठारनिहारितजैफलताकीयहैजो
हियोजरई । आजुतेकवलतोकोमहाधिकक्षत्रिनपैजोदयाक-
र्है ॥ ३७ ॥ गीतिकाछन्द ॥ तबएकविंशतिबेरमैं बिनक्षत्रकी
पृथिवीरची। बहुकुंडशोणित सोंभरेपितृतर्पणादिकियासची ॥
उबरेजेक्षत्रियक्षुद्रभूतलशोधिशोधिसंहारिहौं । अबबालवृद्धन
ज्वानछाँडहुँधर्मनिर्देय पारि हौं ॥ ३८ ॥
टी०-सरस्वतीउक्तार्थः लक्ष्मण के पुरिखान बडेन जो पुरुषारथ कियो है सो
कह्यो नहीं परत कहा पुरुषारथ कर्यो जिन बनितन को बेष बनायो अर्थ बनिता
रच्यो गौतम की स्त्रीको पाथर सों स्त्री बनायो जाको देखत हियो हरिजात है
अर्थ अति सुंदरी बनायो तौ या जनायो सृष्टि करिवे को समर्थ हैं याही विधि
दशरथ भगीरथादि के कृत गंगा ल्याइबो आदि जानो सो हेक्रूरकुठार ! तिनको
निहारि कै तजै कहै छोडै अर्थ इनके समीपेते अन्यत्र जाइ तौ नाको इनके
वियोग को यहै फल है जो हृदयजरई कहै जरतहै अर्थ अति सुंदररूप जे येहैं
तिनक वियोग सों हृदयजरत है इनके योगको यहै फल है तासों जो तेरो
इनको वियोग ह्वै है ता तैसे हियोजरिहै सोआजकेवल कहै एक तोको महा
अधिक कहै महाउत्तम है जो क्षत्रिन के ऊपर दया करु आजुतक क्षत्रिनको
वध करचो ता क्षत्र वर्णनमें ये ऐसे रूप गुण बलादि पूरित भये तासों अब
क्षत्र वर्णकी रक्षा करिवो तोहिं उचितहै तिनके निकट रहि सहायता करि क्षत्री-
वर्ण तोंकों रक्षणीय है ॥ ३७ ॥ सची कहै करी ॥ ३८ ॥
मू०-राम-दोहा ॥ भृगुकुलकमलदिनेशसुनि, ज्योति
सकलसंसार ॥ क्योंचलिहैइनशिशुनपै, डारतहौयशभार
॥ ३९ ॥ परशुराम-सोरठा ॥ रामसुबन्धुसँभारि, छोडत
हौंशरप्राणहर ॥ देहुहथ्यारनडारि, हाथसमेतिनबेगिदै ॥४०॥