सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 269 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 45

मू०-रावण-मधुछंद ॥ मोकहँरोकिसकेकहिकोरे ।
युद्धजुरैयमहूंकरजोरे ॥ राजसभातिनुकाकरिलेखों । देखिकै
राजसुताधनुदेखौं ॥ २१ ॥ सवैया ॥ बानकह्योतबरावणसों
अबवेणिचढाउशरासनको । वातबनाइबनाइकहाकहछोडि
देआसनवासनको । जानतहैकैधौं जानतनाहिंनतू अपनेमद
नाशनको । ऐसेहिकैसेमनोरथपूरतपूजेबिना नृपशासनको
॥ २२॥ रावण-बंधुछन्द ॥ बाननबाततुम्हैकहिआवै॥ बान॥
सोईकहौंजियतौहिंजोभावै ॥ रावण ॥ काकरिहौहमतौंहीं
बरैंगे ॥ बान ॥ हैहयराजकरीसोकरेंगे ॥ २३ ॥ रावण-दं
डक ॥ भौंरज्यौंभवतभूतवासुकीगणेशयुतमानोमकरन्द
बुन्दमालगंगाजलकी । उडतपरागपटनालसीविशालवाहुक
हाकहौंकेशोदासशोभापलपलकी । आयुधसघनसर्वमंगला
समेतिसर्वपर्वतउठाइगतिकीन्हीहैकमलकी । जानतसकललो
कलोकपालदिगपालजानतनबानबातमेरेबाहुबलकी॥ २४ ॥
टी०-॥ २१॥ आसन बिछावने औ वासन वस्त्रनको छोडिदे अर्थ मलरूप
काचिधनुष उठावोआइ अथवा सीताके लेवेकी जे आशा है तिनकी कामना स्मरण
छोडिदे अपने मदनाशनको मोको तू जानतहै कि नहीं जानत जो ऐसी बात कहत
हैं कि सीताको बिना धनुष तोरेही बरिहों अथवा अपने मदनाशनको धनुषको अर्थ
यह धनुष तुम्हारे मदको नाश करिहै नृपशासन धनुष उठाइबो ॥२२॥ हैहय राजा
सहस्रार्जुन ॥ २३ ॥ वासुकी सर्प औ गणेश सहित भूतगण जा पर्वत में कमल-
के भौंरसम भंवत भये औ महादेवके शीशको जो गंगाजल गिर्यो ताकी माल
मकरंद पुष्परस भयो औ उडत ये पार्वती आदि के पटवस्त्र हैं तेई पराग पुष्प-
धूलि औ मेरो बाहु जो हैं सो नाल कमलदंड भयो एने में या जनायो कि जब
मैं कैलास उठायो तब अतिशीघ्र उठायो तासों शंभुशीश को गंगाजल गिर्यो औ
वस्त्र उडत भये औ आयुध सघन कहि या जनायो कि तुम एक शंभु धनुष
उठाइबो कठिन मानत हौ वा पर्वतमें ऐसे अनेक आयुध रहे सर्व मंगला
पार्वती ॥ २४ ॥