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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 269 में से

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पृष्ठ 44

सवैया ॥ कैटभसोंनरकासुरसोंपलमेंमधुसोंमुरसोंज्यहि
मारचो । लोकचतुर्दशरक्षककेशवपूरणवेदपुराणबिचारचो ।
श्रीकमलाकुचकुंकुममंडितपंडितदेवअदेवनिहारचो । सोक
रमांगनकोबलिपै करतारहुनेकरतारपसारचो ॥ १६ ॥
रावण-दोहा ॥ हमैंततुम्हैनहिंबुझिये, बिक्रमबादअखंड ।
अबजोयहकहिदेहिगो, मदनकदनकोदंड ॥ १७ ॥ संयुत-
तछंद ॥ ब्रतबाणरावणकीसुन्यो । शिरराजमंडलमेंधुन्यो ॥
बिमति ॥ जगदीशअबरक्षाकरो । विपरीतबातसबैहरो ॥
॥ १८ ॥ दोहा ॥ रावणबाणमहाबली । जानतसबसंसार ।
जोदोऊधनुकर्षीहैं, ताकोकहाविचार ॥ १९ ॥ बाण-
सवैया । केशवऔरतेऔरभईगतिजानिनजाइकछूकरतारी ।
शूरनकेमिलिबेकहँआयमिल्योदशकंठसदाअविचारी ।
बाढ़िगयोबकवादवृथायहभूलिनभाटसुनावहिंगारी । चापच
ढ़ायेकिकीरतिकोयहराजकरैतेरीराजकुमारी ॥ २० ॥
टी०-जा कर ने कैटभादि बली दैत्यनको मारचो फेरि चौदहौ लोककी रक्षा
करतहैं यों कहि कर कि बडी शक्ति जनायो फेरि श्रीकमलालक्ष्मी के
कुचन में कुंकुम केशरि के मंडित में भूषित करै मो अर्थ मकरिका पत्र बनावै में
पण्डित है यासों या जनायो कि जिन विष्णुके लक्ष्मी स्त्री हैं तासों सबसब
पदार्थ सों पूरण जानौ जामेंती शक्ति है शारद् कर हाथ करता करतार जे ब्रह्मा
हैं तिनहुन के करतार जे विष्णु हैं तिन् बलिपै मांगिबे को पसारचो ऐसे बली
विष्णु बलिपैं भिक्षाही मांगि पायो जीतिकै न पाई तासों विष्णु हूं सों अधिक
बलि औ दाता जानौ इति भावार्थ ॥ १६ ॥ १७ ॥ ब्रत धनुष उठाइबेकी
प्रतिज्ञा ॥ १८ ॥ १९ ॥ विमति के ऐसे विकल वचन सुनि बाण कह्यो कि हे
भाट ! सीताके व्याहिबेको बाणधनुष उठावत है ऐसी जो गारी है ताको
भूलिहू न सुनाउ सीता हमारी माता हैं उनतिसयें दोहा में कह्यो है कि सीता
मेरी माई है ॥ २० ॥