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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 269 में से

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पृष्ठ 35

तृतीयप्रकाशः ३. ( २९ )

•मू०-॥ दोहा ॥ द्विजदोषीनविचारिये, कहापुरुषकह
नारि ॥ रामविरामनकीजिये, वामताडुकातारी ॥ १० ॥
मरहट्टाछंद ॥ यहसुनिगुरुवानीधनुगुनतानीजानीद्विजदुख
दानि । ताडुकासंहारीदारुणभारीनारीअतिबलजानि ॥
· मारीचबिडारयोजलधिउतारयो मारयोसबबलसुबाहु ॥ देव
निगुनपर्य्योंपुष्पनिवर्य्योंहर्ष्योंअतिसुरनाहु ॥ ११ ॥ दोहा ॥
पूरणयज्ञभयोजहीं, जान्योविश्वामित्र ॥ धनुषयज्ञकीशुभ
कथा, लागेसुननविचित्र ॥ १२ ॥
टीका-विराम कहे बेर ॥ १० ॥ ताडुकादि वध मों गुणनकी परीक्षा कियो
कि ये गुण विष्णुही में हैं तासों विष्णु को अवतार भयो अब रावण वध ह्वै है
यह जानि इंद्र हर्षित भये ॥ ११ ॥ १२ ॥
मू०-॥ चंचरीछंद ॥ आयोंतेहिकालब्राह्मणयज्ञको
थलदेखिकै । ताहिपूंछतबोलिकैऋषिभाँतिभाँतिविशेषिकै ॥
संगसुंदररामलक्ष्मणदेखिदेखिसोहर्षई । बैठिकैसोइराज
मंडलवर्णईसुखवर्षई ॥ १३ ॥ ब्राह्मण ॥ शार्दूलविक्रीड़ि-
तछंद ॥ सीताशोभनव्याहउत्सवसभासंभारसंभावना तत्त-
त्कार्यसमग्रव्यग्रमिथिलावासीजनाशोभना ॥ राजाराजपुरो-
हितादिसुहृदोमंत्रीमहामंत्रदानानादेशसमागतानृपगणा पू-
जापराःसर्वदा ॥ १४ ॥
टीका-जनकपुरको ब्राह्मण सीयस्वयंवर के अर्थ काहू राजाको निमंत्रण
लिये जात रह्यो सो यज्ञ को स्थान देखिवे को सुभावही आयो अथवा ऋषिही-
को निमंत्रण ल्यायो है अथवा कोउ साधारण पथिक ब्राह्मणहै ताको निकट
बोलिकहे बोलाइकै विश्वामित्र भाँति भाँति विशेषसों जनकपुरकी कथा पूंछत हैं
सो ब्राह्मण ऋषिकेसंग रामलक्ष्मणको देखि ऋषिकी स्त्रीके वचन सत्य जानि
अब सीताको व्याह है है यह निश्चय करि हर्षित आनंदित होतहैं काहेतै