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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 269 में से

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पृष्ठ 34

(२८) रामचन्द्रिका-सटीक ।
चंचला ॥ रक्षिवेकोयज्ञकुलबैठेवीर सावधान । होंनलगेहो-
मकेजहांतहांसबैविधान ॥ भीमभाँति ताड़ुकासो भंगलागिक-
र्नआइ । वाननानिरानपै ननारिजानि छाँडिजाइ ॥ ६ ॥
ऋषि-सोरठा ॥ कर्मकरतियहघोर, विप्रनकोदशहूदिशा ।
मत्तसहसगजजोर, नारीजानिनछाँडिये ॥ ७ ॥ राम-शशिव-
दना ॥ सुनुमुनिराई जगसुखदाई । कहिअबसोई । जेहि
यशहोई ॥ ८ ॥ ऋषि-कुंडलिया ॥ सुताविरोचनकीहुतीदी-
रघजिह्वानाम् । सुरनायकहैसंहरीपरमपापिनीवाम ॥ पर-
मपापिनीबाम बहुरिउपजीकविमाता । नारायणसोहतीचक्र
चिंतामणिदाता ॥ नारायणसोहती सकलद्विजदूषणसंयुत ।
त्योंअबत्रिभुवननाथ ताड़कातारुहसहसुत ॥ ९ ॥
टीका-साधु कथा उत्तम कथा विष्णुविषयकीनी आदि अथवा साधु जे संत-
जन हैं नारदादि तिनकी कथा तहाँ तेहि आश्रम में मुनि जनन करि कै कथिये
कथन करियतहैं औ जहाँ केवल मनही को निग्रहहै मनइंद्रिन को राजा है
मनके निग्रहसों सब इन्द्रिनंको निग्रह जानो औ तहां मानदिनहीं के है और
काहूके नाहीं है दिनपक्ष में मानप्रमाण दिन मान कैतो है यह पूछिवे की रीति
लोकमें प्रसिद्ध है अन्यत्र मानगर्व परिसंख्यालंकार है अथवा दिनही को मान
आदर है यज्ञादिसत्कर्म दिनही में होत हैं तासो ॥ ५ ॥ ६ ॥ ७ ॥ ८ ॥
विरोचन बलिके पिताकी सुता दीरघजिह्वानामा पापिनी रही ताको सुरनायक
इंद्र मारचो है औ फेरि अति पापिनी कविजे शुक्र हैं तिनकी माता भई ताको
नारायण मारचो है एक समय देवनके युद्ध में हारिकै दैत्य ब्राह्मणके शरणमें
बचिवो जानिकैं शुक्र माताके शरण जाइ लुकाने तहां शत्रुको रक्षक जानि
इंद्रकी आज्ञा सों विष्णु शुक्र माता को शिर चक्रसे खंडन करि दैत्यनको
मारचो है ताही कोपसों भृगुमुनि जाइ विष्णुके उरमें लात मारचो है औ आपने
पुत्र शुक्र को दैत्यगुरु कियो है यह कथा पुराणनमें प्रसिद्धहैं कैसे हैं नारायण
चिन्तामणि के दाता हैं अथवा चिंतामणि सरिस दातहैं सकल द्विज दूषण
संयुत ताड़ुका को विशेषण है औ सहसुत कहे मारीच सहित यासों या जनायो
इन्द्र विष्णुहूं दुष्टस्त्री वध कियो है ॥ ९ ॥