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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 269 में से

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पृष्ठ 32

मानौ अर्थ जो राक्षसवधमें वा वेधनादिकृत रामचन्द्र करि हैं सो कृत रामचन्द्र
द्वार है विश्वामित्रही करि हैं आशय यह कि यामें कछू श्रम रामचंद्र को नहीं
है ये केवल तुम्हारे पुत्रको यश दियो चाहत हैं याते इन सम मित्र दूसरो न जानौ
अथवा रामचन्द्रमय कहे रामचन्द्र प्रति समर्पित मानिये अर्थ जो करत है सो
रामचन्द्र को समर्पण करत हैं ॥ २६ ॥ २७ ॥ वारि जलसों भरित रोचनकों
वारिद मेघ भये अरुण रंग हैं आंशुनकी वर्षा करन लागे ॥ २८ ॥ वेदके मंत्र
औ तन्त्र शास्त्र के मन्त्र शोधि शोधि कै दियो अथवा वेदके मंत्र दिये बलातिबला
विद्या दियो है सो वाल्मीकीयरामायणमें लिख्यौ है औ तंत्रशास्त्रके मंत्रनसों
शोधिकै मंत्रि करिकै अस्त्रशस्त्र दिये क्षिप्र कहे जल्दी तिन विद्यानके प्रभाव सों
लोभादिक वासना दूरि भई यथा । रघुवंशे । “ तौ बलातिबलयोः प्रभावतो
विच्ययोः पथि मुनिप्रदिष्टयोः । मम्लतुर्न मणिकुट्टिमोर्जितो मातृपार्श्वपरिवर्त्ति
नाविव ” ॥ २९॥
मू०-निशिपालिकाछन्द ॥ कामवनरामसबबासतहरुदे-
खियो । नैनसुखदैनमनमैनमलैलेखियो । ईशजहँकाम-
तनु कैअतनुडारियो । छोडिवहयज्ञथलकेशवनिहारियो॥३०॥
दोहा ॥ रामचंद्रलक्ष्मणसहित, तनमन अतिसुखपाइ ॥
देख्यो विश्वामित्रको, परमतपोवनजाइ ॥ ३१ ॥
इंति श्रीमत्सकलो कलोचनचकोरचिन्तामणि-श्रीरामचन्द्रचन्द्रिकाया-
मिंद्रजिद्विरचितायां रामचन्द्रलक्ष्मणयोर्विश्वामित्रतपो वनगमनं
नाम द्वितीयः प्रकाशः ॥ २ ॥
टी०-जा वनमें महादेव कामको जारयो है ताको कामवन नाम है अथवा
कामवन कहे अभिलाषको दाता वनतवनमें रामचन्द्र सब वास कहे ऋषिन के
वास कुटीति औ तरुवृक्ष देख्यो अथवा वासतरु सुगंधयुक्त तरुमैनमय कहे काम
स्वरूपता बनमें ईश महादेव जहाँ जा स्थान में काम को जारयो हैता स्थानको
देखि छोडिकै विश्वामित्र को यज्ञ थल जाइकै देख्यो ॥ ३० ॥ ३१.॥
इति श्रीमज्जगजननीजनकजानकीजानकीजानिप्रसादाय जनजानकीप्रसाद
निर्मितायां रामभक्तिप्रकाशिकायां द्वितीयःप्रकाशः ॥ २ ॥