रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें•मू०-राजवैहवैहसाजवहैपुर । नामवैहवहधामवैहैगुर ॥
झूठेसोंझूठई बांधतहौमन । छोड़तहौनृपसत्यसनातन ॥२३॥
॥ दोहा ॥ जान्योविश्वामित्रके, कोपबढ्योउरआइ । राजा-
दशरथसों कह्यो, वचनवशिष्ट बनाइ ॥ २४ ॥ षटपद ॥
इनहींकेतपतेजयज्ञकीरक्षाकरिहैं । इनहींकेतपतेज सकलरा-
क्षसबलहरिहैं ॥ इनहीकेतपतेजबढिहै तनतूरण । इनहीकेतप
तेज होहिंगेमंगलपूरण । कहिकेशवजैयुतआइहैंइनहीकेतपते-
ज घर । नृपबेगिराम लक्ष्मण दुवौसौंपौविश्वामित्रकर ॥२५॥
टी०-साजछत्र चामर चमू आदि नाम यश गुरु वशिष्ठ झूठे जे पुत्रादि
हैं तिनसों झूठई कहे वृथाहैी मनको बांधतहौ लगावतहौ अथवा
झूठेसां कहे झूठे न सहित है अर्थ पुत्रादि झूठे माया के प्रपंच हैं तिनसों मिलिकै
झूठइ जो झुठाई है तासों मनको बांधत हौ अर्थ की ना बांधौ अथवा झूठेकी सो
कहें झूठेकी तरह जैसे झूठामाणी झूठाइमें मनलगावतहै तैसे तुमहूं लगावतहौ
औ सनातन कहे परंपराको सत्य छोड़त हौ देनकहि अब नहीं देत सो ना
चाहिये ॥ २३ ॥ २४ ॥ तेजप्रताप तूरन जलदी मंगल विवाहादि ॥ २५ ॥
म०-सोरठा ॥ ॥राजाऔरनमित्र, जानहुँ विश्वामित्रसे ॥
जिनकोअमितचरित्र, रामचन्द्रमय मानिये ॥२६॥ दोहा ॥
नृपपैवचनवशिष्ठको, कैसेमेटयोजाइ ॥ सौंप्यो विश्वामित्र
कर, रामचन्द्रअकुलाइ ॥ २७ ॥ पंकजवाटिकाछंद ॥ राम-
चलत नृपके युगलोचन । वारिभरितभये वारिदरोजन ॥
पायनपरिकृषिकेसजिमौनाहिं । केशवउठिगयेभीतरभौनाहिं ॥
॥ २८ ॥ चामरछन्द ॥ वेदमंत्रतंत्रशोधिअस्त्रशस्त्रदैभले ॥
रामचन्द्रलक्ष्मणैसोविप्रक्षिप्रलैचले ॥ लोभक्षोभमोहगर्वका
मकामनाहई । नींदभूखप्यासत्रासवासनासवेगई ॥ २९ ॥
टी०-राक्षसवधमें अमित कहे संपूर्ण जो चरित्र हैं सो राम-चन्द्रमय कहे
रामचन्द्रचरित्र मय रामचन्द्र चरित स्वरूपति जिनको विश्वामित्रहीको चरित्र-