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सर्वकोश
रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary

महाकवि केशवदास द्वारा

DevanagariHindipublished269 पृष्ठ

पृष्ठ 134, कुल 269 में से

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पृष्ठ 134

कहे चन्द्रमाकी अर्थ चन्द्रप्रकाश नहीं होन पावत औ नै जे नदी हैं ते न कहे
नहीं हैं अमल निर्मल अर्थ नदीनको जल म्लान है जात है औ कमलनको दल
समूह दलित होत है औ निकाई कहे काई सों रहित है अथवा कमलदलकी
दलित है निकाई जामें केशवदास कहत हैं कि रेणुका जो धूरिरहै ताको गमनहर
प्रबल है क कहे जल जामें अर्थ ऐसो जल चारों ओर भयो है जासों धूलि नहीं
उडति औ मुकुत कहे त्यक्त है हंसक जे हंस हैं तिनको सुखदाई शब्द जामें
वर्षामें हंस उडजातहैं यह प्रसिद्ध है औ अम्बर जो प्रकाश है तामें वलित
कहे युक्त नीलकण्ठ जे मोर हैं तिनकी मतिको मोहै कहे प्रसन्न करति हैं कालि-
का कैसी है कि भौंहैं हैं सुरचाप इन्द्रधनुषहू ते चारु जाकी औ प्रमुदित कहे
उन्नत हैं पयोधर स्तन जाके भूषणनमें जराइ कहे जराऊ जो ज्योति है तामें
तडित जो बिजुली है ताकी तरलाई चंचलता है अथवा भूषणमें जडाऊकी जो
ज्योति है सो जटिल समरलाई कहे योजित है अर्थ भूषणनमें रतननकी ज्योति
बिजुली सम दमकति है रत्नजटित भूषण जडाऊ कहावत हैं औ दूरि कीनी है
सुख मुख कहे सहज मुखही सो शशि जो चन्द्र है ताकी सुखमा शोभा अर्थ
सहजमुख ऐसो छविवान् है जामें चन्द्र द्युति मंद होति है औ अमल कहे स्वच्छ
जे नयन हैं तिन करिकै कमलदलकी निकाई दलित है अर्थ जिनके नयननके
आगे कमलनकी छवि दलि जाति है औ केशवदास कहत हैं कि प्रबल कहे
नीको जो करेनुका हस्तिनी को गमन है ताकी हरणहारी है औ मुकुत कहे
छूटचो अर्थ उच्चरित जो हंसक कहे बिछुवान को शब्द है सोहै सुखदायी जाको
अर्थ जाके चलतमें सुखदायक अनेक रंगको बिछुवानको शब्द होतहै औ अम्बर
जो वस्त्रहैं तामें वलित युक्त नीलकण्ठ जे महादेव हैं तिनकी मति को मोहन है
यहाँ काली पदते पार्वती जानो ॥ २० ॥
मू०-तारककन्द ॥ अभिसारिनिसीसमुझैंपरनारी । सत-
मारगमेटनकोअधिकारी ॥ मतिलोभमहामदमोहछयीहै ।
द्विजराजसुमित्रप्रदोषमयीहै ॥ २१ ॥ दोहा ॥ वर्णतकेशव
सकलकवि, विषमगाढ़तमसृष्टि ॥ कुपुरुषसेवाज्योंभई,
संततमिथ्यादृष्टि ॥ ॥ २२ ॥ चंद्रकलाछंद ॥ कलहंसकला
निधिखंजनकंजकछूटिदिन केशवदेखिजिये । गतिआननलो-