रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

रामचन्द्रिका (महाकवि केशवदास - सविस्तार सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Ramachandrika of Mahakavi Keshavdas with Commentary
महाकवि केशवदास द्वारा
DevanagariHindipublished269 पृष्ठ
पृष्ठ 133, कुल 269 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 133
An exact, line-by-line transcription of the Hindi/Braj text from the image into Devanagari:
मेघनके अयन कहे घरमें मध्यममें इति नहीं है प्रत्यक्ष धनुष है सूर्य की किरणें
मेघनमें परि इंद्र धनुष होत है यह प्रसिद्ध है खड्ग कहे तरवारि द्युतिवंत चन्द्र-
शुक्रादि तौ एकही चूकसों जातिमात्रको दंड बडे कांपको जनावत है चन्द्रवन्धू
वीरबहोटी रसराज में कह्योहै नवलवधू उरलाजे इन्द्र वधूसीहोई ॥ १६ ॥
मू०-अतिगाजतबाजतदुंदुभिमानो ॥ निरघातसबैपविपा-
तबखानो ॥ धनुहैयहगोरमदाइनिनाहीं । शरजालबहैजल-
धार वृथाहीं ॥ १७ भटचातकदादुरमोरनबोलै । चपलाचम-
कैनफिरैखरगखोलै ॥ द्युतिवंतनकोबिपदाबहुकीन्हीं । धरनीक-
हँ चंद्रवधूधरिदीन्हीं ॥ १८ ॥ तरुनीयहअत्रिऋषीश्वरकीसी ।
उरमें हमचन्द्रकलासमदीसी ॥ वरषानसुनैकिलकैकिलका-