राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)
Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation
महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंद्वितीय तरंग १९९
प्राणियों को ब्रह्मा ने 'ॐ' का उपदेश दिया था ।
( म० धारव० २६:८ ) पद्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा
के हृदय से बकरी, उदर से गाय, भैसादि ग्राम्य पशु
समूह, तथा पद से अश्व, गधा, ऊँट आदि वन्य पशु
उत्पन्न हुए थे । मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा के
दक्षिण अंगूठा से दक्ष, हृदय से मदन, अधर से लोभ,
अहंभाव से मद, नेत्र से मृत्यु, स्तनाग्र से धर्म, भ्रूमध्य
से क्रोध, बुद्धि से मोह, कंठ से प्रमोद, हथेली
से भरत, एवं शरीर से सतरूपा नामक पत्नी उत्पन्न
हुई थी । मत्स्य पुराण एवं महाभारत के अनुसार
ब्रह्मा के शरीर से मृत्यु नामक नारी उत्पन्न
हुई थी । ( म० द्रो०:१:म:१५० )
पुराणों के अनुसार ब्रह्मा के चार मुखों से वेदों
तथा समस्त वैदिक साहित्य एवं ग्रन्थों का निर्माण
हुआ था । ब्रह्मा के, पुराणों के अनुसार, चतुर्मुख हैं ।
(१) पूर्व मुख से गायत्री छंद, ऋग्वेद, त्रिवृत रथन्तर
एवं अग्निष्टोम, (२) दक्षिण मुख से-यजुर्वेद,
पंचदश ऋक् समूह, बृहत्साम, एवं उक्थ यज्ञ, (३)
पश्चिम मुख से-सामवेद, सप्तदश ऋक्समूह, वैरूप
साम, एवं अतिरात्र यज्ञ, एवं (४) उत्तर मुख से-
अथर्ववेद, एकविंश ऋक् समूह, आप्तोयम अनुष्टुप्
छन्द एवं वैराज साम उत्पन्न हुए थे ।
ब्रह्मा के मानस पुत्र, मरीचि, अग्नि, अंगिरस,
पुलस्त्य, पुलह, ऋतु, दक्ष, भृगु एवं वसिष्ठ थे ।
( ब्रह्म० ब्रह्माण्ड:२:९ )
महाभारत में सृष्टि निर्माण का क्रम दिया गया
हैं । शंकर ने यज्ञ किया । ब्रह्मा ने अपने वीर्य की
आहुति दी । उस यज्ञ से प्रजापतियों का जन्म
हुआ । ( म० अनु० ८५:९९-१२० ) पद्म पुराण
और प्रकार उपस्थित करता है । सर्वप्रथम तमोगुणी
प्रजा उत्पन्न हुई । वह पांच प्रकार यथा-तम,मोह,
महामोह, तामिस्र एवं अन्धतामिस्र थी । तत्पश्चात्
आठ सृष्टियो का निर्माण किया उनमें उत्पन्न
प्राणी-तिर्यक् स्रोतस् (पशु), ऊर्ध्वस्रोतस् (देव) अर्वाक्,
स्रोतस् (मानव) अनुग्रह, भूत, प्राकृत, वैकृत, एवं
कौमार थे । देव राक्षस किन्नर मनुष्य यक्ष एवं पिशाच
गणों की उत्पत्ति ब्रह्मा ने मनःसामर्थ्य से की थी ।
ब्रह्मा का प्रथम शरीर तमोगुणी था । उसके जघन
से असुरों का निर्माण हुआ । तमोगुण का त्याग कर
ब्रह्मा ने सतोगुणी शरीर धारण किया । परित्याग
किये तमोगुणी शरीर से रात्रि का निर्माण हुआ ।
सतोगुणी शरीर से देवों का निर्माण हुआ । इस
शरीर का भी ब्रह्मा ने त्याग किया । इससे दिन की
उत्पत्ति हुई । इसके तृतीय शरीर से पितर उत्पन्न
हुए । उसके त्यक्त भाग से सन्ध्या काल का जन्म
हुआ । ब्रह्मा के चतुर्थ शरीर से मानवों की उत्पत्ति
हुई । उसके त्यक्त भाग से उषा काल का निर्माण
हुआ । इसके पाँचवें शरीर से यक्ष एवं राक्षस
उत्पन्न हुए ।
(३) यमः- यम के पिता वैवस्वत तथा माता
सरण्यू थी यम यमी दोनों युगल सन्तान थे (ऋ० १०
१४:१७:१०:१४.१) उन्हें यमो मिथुनौ, कहा जाता
है । जुड़वा के अर्थ में प्रयुक्त होता है । यम यमी एक
साथ जुड़वा पैदा हुए थे । [ऋ० १:६६:४:१:२६४
:१५:२:३९:२] यम वैदिक काल से मृत्यु के देवता
माने गये हैं [ १:१६५:४ ] वे पहले प्राणी हैं।
जिनकी मृत्यु हुई थी [ अ० १८:३:१३ ] ऋग्वेद में
यम यमी का संवाद प्रसिद्ध हैं । उसमें भाई एव बहन
के विवाह का निषेध किया गया है। मृतकों को
विश्राम स्थान प्रदान करता है । ( ऋ० १०:१४
:१८ तथा १०:१६) वह प्रथम मनुष्य था (अ०
८:३:१३ ) यमको दक्षिण दिशा का राजा कहा गया
है ( श. ब्रा० २:२:४:२ ) यम के दूत दो श्वान हैं।
उनके चार नेत्र हैं । उनकी नासिका चौड़ी है ।
उनका नाम उलूक तथा कपोत है । [ऋ० १०:१६५
:४ ) उन्हें शबल एवं उदुंबल भी कहा गया है ।
(ऋ० १०:१३:४ )
वेदों के पश्चात् यम का रूप बदलता गया है ।
उसे विवस्वत् तथा संध्यापुत्र कहा गया है
(ह-वं १:९:४ मार ७४:७मा० ६:३:४०) यमके बरवों