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राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

राजतरंगिणी (महाकवि कल्हण - सम्पूर्ण काश्मीर व भारत राजवंश इतिहास)

Rajatarangini of Kalhana with Hindi Translation

महाकवि कल्हण / पं. रघुनाथ सिंह द्वारा

DevanagariHindipublished984 पृष्ठ

पृष्ठ 117, कुल 984 में से

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पृष्ठ 117

३८ राजतरङ्गिणी
में प्रवेश किया। तत्पश्चात् भिल्ल देश, गौड़ देश,
शुकदेश, यवनदेश, ताम्रदेश होता अश्व करतोया
तट पर पहुँचा। वहाँ से चलता ज्वालामुखी के
पर्वतीय क्षेत्रों में अश्व ने प्रवेश किया !
आनंद रामायण ने काश्मीर तथा उसके चारों
ओर के देशों का वर्णन किया है। यह भौगोलिक
वर्णन अंशतः ठीक है। काश्मीर के सीमावर्ती देशो
यथा, गांधार, कांबोज, शिवि आदि देशो का स्पष्ट
उल्लेख नही किया गया है। मालूम होता है कि
आनंद रामायण के लेखक के समय में उन देशों की
गणना यवन किंवा शक देश में होने लगी थी।
भगवान् श्रीरामचन्द्र जी ने उत्तरी दिशा की
तीर्थ यात्रा की थी। उसका वर्णन यात्रा कांड,
आनंद रामायण (सर्ग ९।१-३१) में किया गया
है। उसमे उनका ज्वालामुखी, देवप्रयाग, अलकनंदा
के तट से होते हुए, श्रीबदरी आश्रम पहुँचना
दिखाया गया है। श्रीबदरी आश्रम के पश्चात्
श्रीराम केदारेश्वर गये। वहां से हिमाद्रि पर गये।
यहाँ से महापथ होते हुए मानसरोवर की यात्रा
की। मानसरोवर से बिंदु सरोवर गये। वहाँ से
हिमालय होते हुए मेरु पर्वत गये। तत्पश्चात्
कैलास पर गये। वहाँ से भागीरथी के तट से होते
हुए हरिद्वार आए। हरिद्वार से कुरुक्षेत्र होते हुए
इंद्रप्रस्थ पहुँचे। इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) से मधुवन
(मथुरा), वृन्दावन, गोकुल तथा गोवर्धन होते हुए
अवंतिका अर्थात् उज्जैन गये।
मानसरोवर के पश्चात् देव, गंधर्व, किन्नर
जातियों का उल्लेख आता है। प्रतीत होता है।
भगवान रामचन्द्र काश्मीर के ऊपर अर्थात् उत्तरीय
सीमा स्पर्श करते हुए, मेरु तक पहुंचे थे। भगवान्
श्रीराम वहाँ से कैलास गये। इससे स्पष्ट होता है।
उन्होंने पश्चिम की तीर्थ यात्रा यथा जालंधर,
मूलस्थान, गांधार, कांबोज अथवा शिवि देश की
नहीं की। मेरु के दक्षिण काश्मीर का स्थान
निर्विवाद रूप से सभी प्राचीन ग्रन्थों ने स्वीकार
किया है।
वाल्मीकीय रामायण में काश्मीर. का नाम
मुझे कही पर मिल नही सका। संभव है। अपने
दृष्टिदोष के कारण उसे न देख सका हूँ। परन्तु मै
समझता हूँ कि काश्मीर का स्पष्ट रूप से उल्लेख
रामायण में नहीं है।
योग वासिष्ठ रामायण मे काश्मीर का सबसे
अधिक ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृश्यों का वर्णन
किया गया है। काश्मीर इतिहास पर उससे विशेष
प्रकाश पड़ता है। उस स्थान का वर्णन श्लोक २६
टिप्पणी में किया गया है।
राज तरंगिणी में श्रीराम के काश्मीर आने की
बात तथा उसका क्या प्रमाण है, आदि पर
यथास्थान प्रकाश डाला गया है। एक स्थान पर
उल्लेख मिलता है। राम ने काश्मीर में एक मंदिर
का निर्माण करवाया था।
महाभारत में काश्मीर
महाभारत सभा पर्व (२७:१७) और भीष्म
पर्व (९:५३-६७) में उल्लेख मिलता है। काश्मीर
भारतीय जनपद था। अर्जुन ने इसे दिग्विजय के
समय जीता था। सभा पर्व (३.४०१२:५२) तथा
वन पर्व (५१.२६) के अनुसार काश्मीर निवासी
महाराज युधिष्ठिर के लिये भेंट लाये थे। द्रोण पर्व
(११:१६ तथा ७०:११) में उल्लेख आता
है। काश्मीर को भगवान् श्रीकृष्ण तथा परशुराम ने
विजय किया था। अर्जुन ने अपने दिग्विजय के समय
काश्मीर को जीता था।
तत. काश्मीँरकान् वीरान् क्षत्रियान् क्षत्रियर्षभः ।
व्यजयल्लोहितं चैव मण्डलैर्दशभिः सह ॥
—सभापर्व २७:१७
तिल्लारा मर्मराश्च मधुमत्तः सुकन्दरूः ।
काश्मीराः सिन्धुसौवीरा गान्धारादर्शकास्तथा ॥
—भीष्मपर्व ९:५३-६७