रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजहा जाऊ तहा दुख का रासा ।
जो न पतियाइ साधु हैं साखी ॥७॥
जम दूतन बहु बिधि करि मारयो ।
तऊ निलज अजहूँ नहिँ हारयो ॥८॥
हरिपद बिमुख आस नहिँ छूटै ।
ताते तृस्ना दिन दिन लूटै ॥६॥
बहु बिधि करम लिये भटकावै ।
तुम्हें दोष हरि कौन लगावै ॥१०॥
केवल रामनाम नहिँ लीया ।
संतति बिषय स्वाद चित दीया ॥११॥
कह रैदास कहाँ लगि कहिये ।
बिन जगनाथ बहुत दुख सहिये ॥१२॥
॥ ७९ ॥
त्राहि त्राहि त्रिभुवनपति पावन ।
अतिसय सूल सकल बलि जावन ॥टेक॥
काम क्रोध लंपट मन मोर ।
कैसे भजन करूँ मैं तोर ॥१॥
बिषम बिहंगम दुंद नकारी ।
असरनसरन सरन भौहारी ॥२॥
देव देव दरबार दुआरै ।
राम राम रैदास पुकारै ॥३॥
॥ ८० ॥
दरसन दीजै राम दरसन दीजै ।
दरसन दीजै बिलँब न कीजै ॥टेक॥
दरसन तोरा जीवन मोरा ।
बिन दरसन क्योँ जिवै चकोरा ॥१॥