रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३८ )
बंदत रैदास रघुनाथ सुनु बीनती,
गुरुपरसाद कृपा करौ मेरी ॥ २ ॥
॥ ७७ ॥
कवन भगति ते रहै प्यारो पाहुनो रे ।
घर घर देखौँ मैं अजब अभावनो रे ॥टेक॥
मैला मैला कपड़ा केता एक धोऊँ ।
आवै आवै नींदहि कहाँ लौँ सोऊँ ॥१॥
ज्योँ ज्योँ जोड़ै त्योँ त्योँ फाटै ।
झूठै सबनि जरै उठि गयो हाटै ॥२॥
कह रैदास परो जब लेख्यो ।
जोई जोई कियो रे सोई सोई देख्यो ॥३॥
॥ ७८ ॥
मैँ का जानूँ देव मैँ का जानूँ ।
मन माया के हाथ बिकानूँ ॥टेक॥
चंचल मनुवाँ चहुँ दिसि धावै ।
पाँचो इंद्री थिर न रहावै ॥१॥
तुम तो आहि जगतगुरु स्वामी ।
हम कहियत कलिजुग के कामी ॥२॥
लोक बेद मेरे सुकृत बड़ाई ।
लोक लीक मो पै तजी न जाई ॥३॥
इन मिलि मेरो मन जो बिगार्यौ ।
दिन दिन हरि सौँ अंतर पार्यौ ॥ ४ ।
सनक सनंदन महामुनि ज्ञानी ।
सुक नारद ब्यास यह जो बखानी ॥ ५ ।
गावत निगम उमापति स्वामी ।
सेस सहस मुख कीरति गामी ॥ ६ ॥