रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished52 पृष्ठ
पृष्ठ 41, कुल 52 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 41
( ३४ )
चखबिहीन कर तारि चलतु हैं१,
तिनहिँ न अस भुज दीजै ॥ ३ ॥
कह रैदास बिबेक तत्त बिनु,
सब मिलि नरक परीजै ॥ ४ ॥
—•:—
( राग कानड़ा )
॥ ६९ ॥
माया मोहिला कान्हा, मैँ जन सेवक तेरा ॥ टेक ॥
संसार प्रपंच मेँ व्याकुल परमानंदा ।
त्राहि त्राहि अनाथ गोबिंदा ॥ १ ॥
रैदास बिनवै कर जोरी ।
अबिगत नाथ कवन गति मोरी ॥ २ ॥
॥ ७० ॥
चल मन हरि चटसाल पढ़ाऊँ ॥ टेक ॥
गुरु की साटि ज्ञान का अच्छर ।
बिसरै तौ सहज समाधि लगाऊँ ॥ १ ॥
प्रेम की पाटी सुरति की लेखनि ।
ररौ ममौ लिखि आँक लखाऊँ ॥ २ ॥
येहि बिधि मुक्त भये सनकादिक ।
हृदय बिचार प्रकास दिखाऊँ ॥ ३ ॥
[L