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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 39

जब लग अंक पंक' नहिँ परसै, तौ जल कहा पखार ।
मन मलीन बिषया रस लंपट, तौ हरि नाम सँभारै ॥२॥
जो हम बिमल हृदय चित अंतर, दोप कौन पर धरिहौ ।
कह रैदास प्रभु तुम दयाल हौ, अबँध मुक्ति का करिहौ ॥३॥

( राग गौड )
॥ ६६ ॥
आज दिवस² लेऊँ बलिहारा ।
मेरे घर आया राम का प्यारा ॥टेक॥
आँगन बँगल भवन भयो पावन ।
हरिजन बैठे हरिजस गावन ॥१॥
करूँ डंडवत चरन पखारूँ ।
तन मन धन उन ऊपरि वारूँ ॥२॥
कथा कहैँ अरु अर्थ विचारैँ ।
आप तरैँ औरन को तारैँ ॥३॥
कह रैदास मिलैँ निज दास,
जनम जनम कै काटै पास ॥४॥

॥ ६७ ॥
ऐसे जानि जपो रे जीव,
जपि ल्यो राम न अ्रमो जीव ॥टेक॥
गनिका थी किस केरमा जोग ।
पर-पूरुष सो रमती भोग ॥१॥
निसि बासर दुष्करम कमाई ।
राम कहत बैकुंठे जाई ॥२॥

१ कीचड़ । २ दिन ।