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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 36

( २९ )
आगै पंथ खरा है झीना,
खाँडे धार जैसा है पैना १ ।
जिस ऊपर मारग है तेरा,
पंथी पंथ सँवार सबेरा ॥ ४ ॥
क्या तैँ खरचा क्या तैँ खाया,
चल दरहाल २ दिवान बुलाया ।
साहिब तो पै लेखा लेसी,
भीड़ पड़े तूँ भरि भरि देसी ॥ ५ ॥
जनम सिराना किया पसारा,
सूझि पर्यो चहुँ दिसि अँधियारा ।
कह रैदास अज्ञान दिवाना,
अजहूँ न चेतहु नीफँद ३ खाना ४ ॥ ६ ॥
॥ ६० ॥
खालिक सिकस्ता ५ मैं तेरा ।
दे दीदार उमेदगार, बेकरार जिव मेरा ॥टेक॥
औवल आखिर इलाह, आदम फरिस्ता बंदा ।
जिसकी पनह ६ पीर पैगंबर, मैं गरीब क्या गंदा ॥१॥
तू हाजरा हजूर जोग इक, अवर नहीं है दूजा ।
जिसके इसक आसरा नाहीं, क्या निवाज क्या पूजा ॥२॥
नालीदोज ७ हनोज ८ बेबखत ९, कमिँ १० खिजमतगार तुम्हारा ।
दरमाँदा दर ज्वाब न पावै, कह रैदास बिचारा ॥३॥
॥ ६१ ॥
मैं वेदनि कासनि ११ आखूँ,
हरि बिन जिव न रहै कस राखूँ ॥टेक॥


१ तेज । २ तुरंत । ३ निर्बंध । ४ घर । ५ टूटा हुआ, निर्बल । ६ पनाह, रक्षा ।
७ जूता सीने वाला यानी चमार । ८ अब तक । ९ अभागी । १० कमीना ।
११ किस से ।