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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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( २५ )
॥ ५८ ॥
भेष लियो पै भेद न जान्यो ।
अमृत लेइ बिखै सों मान्यो ॥टेक॥
काम क्रोध में जनम गँवायो ।
साधु संगति मिलि राम न गायो ॥१॥
तिलक दियो पै तपनि न जाई ।
माला पहिरे घनेरी लाई ॥२॥
कह रैदास मरम जो पाऊँ ।
देव निरंजन सत कर ध्याऊँ ॥३॥
(राग बिलावल)
॥ ५९ ॥
का तूँ सोवै जाग दिवाना ।
झूठी जिउन¹ सत्त करि जाना ॥टेक
जिन जनम दिया सो रिजक² उमड़ा³
घट घट भीतर रहट चलावै ।
करि बंदगी छोड़ि मैं मेरा,
हृदय करीम सँभारि सबेरा ।