रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २६ )
कह रैदास प्रकास परम पद, का जप तप बिधि पूजा ।
एक अनेक अनेक एक हरि, कहौँ कौन बिधि दूजा ॥४॥
॥ ५५ ॥
थोथो जानि पछोरी रे कोई ।
जोइ रे पछोरो जा मेँ निज कन होई ॥टेक॥
थोथी काया थोथी माया ।
थोथा हरि बिन जनम गँवाया ॥ १ ॥
थोथा पंडित थोथी बानी ।
थोथी हरि बिन सबै कहानी ॥ २ ॥
थोथा मंदिर भोग बिलासा ।
थोथी आन देव की आसा ॥ ३ ॥
साचा सुमिरन नाम बिसासा¹ ।
मन बच कर्म कहै रैदासा ॥ ४ ॥
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( राग भैरो )
॥ ५६ ॥
ऐसा ध्यान धरौँ बरो बनवारी,
मन पवन दै सुखमन नारी ॥टेक॥
सो जप जपौँ जो बहुर न जपना ।
सो तप तपौँ जो बहुरि न तपना ॥ १ ॥
सो गुरु करौँ जो बहुरि न करना ।
ऐसा मरौँ जो बहुरि न मरना ॥ २ ॥
उलटी गंग जमुन मेँ लावैँ ।
बिनही जल मंजन द्वै पावौँ ॥ ३ ॥
लोचन भरि भरि बिंब निहारौँ ।
जोति बिचारि न और बिचारौँ ॥ ४ ॥
१ बिस्वास ।