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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 30

( २३ )

कह रैदास भगति इक बाढ़ी, अब का की डर डरिये ।
जो डर को हम तुम को सेवौँ, सो दुख अजहूँ मरिये ॥३॥
॥ ४७ ॥
रे मन माछला संसार समुदे, तूँ चित्र बिचित्र बिचारि रे ।
जेहि गाले गलिये ही मरिये, सो सँग दूरि निवारि रे ॥टेक॥
जम छै डिगन¹ डोरि लै कंकन, पर तिया² लागो जानि रे ।
होइ रस लुबुध³ रमै यौं मूरख, मन पछितावै अजान रे ॥१॥
पाप गुलीचा⁴ धरम निबोली⁵ देखि देखि फल चीख रे ।
परतिरिया सँग भलो जौँ होवै, तौ राजा रावन देख रे ॥२॥
कह रैदास रतनफल कारन, गोबिंद का गुन गाइ रे ।
काँचे कुंभ भरो जल जैसे, दिन दिन घटतौ जाइ रे ॥३॥
॥ ४८ ॥
रे चित चेत अचेत काहे, बालक को देख रे ।
जाति ते कोई पद नहिँ पहुँचा, रामभगति बिसेख रे ॥टेक॥
खटकर्म सहित जे बिप्र होते, हरिभगति चित दृढ़ नाहिँ रे ।
हरि की कथा सुहाय नाहीं, सुपच तूलै ताहि रे⁶ ॥१॥
मित्र शत्रु अजात सब ते, अंतर लावै हेत रे ।
लाग वाँकी कहाँ जानै तीन लोक पवेत रे ॥२॥
अजामिल गज गनिका तारी, काटी कुंजर की पास रे ।
ऐसे दुरमत मुक्त कीये, तो क्यों न तरै रैदास रे ॥३॥
॥ ४९ ॥
रथ को चतुर चलावन हारो ।
खिन हाँकै खिन उभटै⁷ राखै, नहीँ आन कौ सारो ॥टेक॥
जब रथ थकै सारथी थाकै, तब को रथहि चलावै ।
नाद बिंद ये सबही थाके, मन मंगल नहिँ गावै ॥१॥


१ बंसी लगाने वाला, मछली मारने वाला। २ पराई स्त्री। ३ लुभाय कर। ४ एक
मीठे फल का नाम। ५ नीम का फल, जो कड़वा होता है। ६ वह डोम के तुल्य है।
७ डगरी लीक पर।