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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 29

( २२ )
पार परम पद मंझ मुरारी ।
ता में आप रमै बनवारी ॥२॥
पूरन ब्रह्म बसै सब ठाईँ ।
कह रैदास मिले सुख साईँ ॥३॥
॥ ४४ ॥
बापुरो सत रैदास कहै रे ।
ज्ञान बिचार चरन चित लावै, हरि की सरनि रहै रे ॥टेक॥
पाती तोड़े पूजि रचावै, तारन तरन कहै रे ।
मूरति काहिँ बसै परमेसुर, तौ पानी माहिँ तिरै रे ॥१॥
त्रिबिध संसार कौन बिधि तिरबौ, जे दृढ़ नाव न गहे रे ।
नाव छाड़ि दे डूंगे१ बसे, तौ दूना दुःख सहे रे ॥२॥
गुरू को सबद अरु सुरति कुदाली, खोदत कोई रहै रे ।
राम कहहु कै न बाढ़ै आपो, सोने कूल बहै रे ॥३॥
झूठी माया जग डहकाया, तौ तिन२ ताप दहै रे ।
कह रैदास राम जेपि रसना, काहु के सँग न रहै रे ॥४॥
॥ ४५ ॥
यह अँदेस सोच जिय मेरे । निसिबासर गुन गाऊँ तेरे ॥टेक॥
तुम चिंतत मेरी चिंतहु जाई । तुम चिंतामनि हौ इक नाईँ ॥१॥
भगति हेत का का नहिँ कीन्हा । हमरी बेर भये बलहीना ॥२॥
कह रैदास दास अपराधी । जेहि तुम द्रवो सो भगति न साधी ॥३॥
॥ ४६ ॥
रामराय का कहिये यह ऐसी, जन की जानत हौ जैसी तैसी ॥टेक॥
मीन पकरि काट्यो अरु फाट्यो, बाँटि कियो बहु घानी ।
खंड खंड करि भोजन कीन्हो, तहउँ न बिसरचो पानी ॥१॥
तैँ हमैँ बाँधे मोह फाँसी से, हम तोको प्रेम जेवरिया बाँधे ।
अपने छुटन कै जतन करते हाँ, हम छूटे तोको आराधै ॥२॥
१ डोंगी। २ तीन।