रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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( २१ )
कहिये तो कहिये काहि कहिये, कहाँ कौन पतियाइ ।
रैदास दास अजान है करि, रह्यो सहज समाइ ॥२॥
( राग सोरठ )
॥ ४२ ॥
ऐसी मेरी जाति बिख्यात चमारं ।
हृदय राम गोबिँद गुनसारं ॥टेक॥
सुरसरि जल कृत बारुनी रे१,
जेहि संत जन नहिँ करत पानं ।
सुरा अपवित्र तिनि गंगजल आनिये,
सुरसरि मिलत नहिँ होत आनं२ ॥१॥
ततकरा३ अपबित्र कर मानिये,
जैसे कागदगर४ करत बिचारं ।
भगवत भगवंत जब ऊपरे लेखिये,
तब पूजिये करि नमस्कारं ॥२॥
अनेक अधम जिव नाम गुन ऊधरे,
पतित पावन भये परसि सारं ।
भनत रैदास ररंकार गुन गावते,
संत साधू भये सहज पारं ॥३॥
॥ ४३ ॥
पार गया चाहै सब कोई,
रहि उर वार पार नहिँ होई ॥टेक॥
पार कहै उर वार से पारा ।
बिन पद परचे भ्रमै गँवारा ॥१॥
१ गंगाजल से जो शराब बनाई जाय तौ भी उसे साधु लोग नहीं पीयेंगे।
२ अगर वही शराब गंगा मे डाल दी जाय तो वह गंगाजल हो जाती है।
३ तत्काल । ४ लेखक ।