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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 26

( १९ )
ज्वानी जुमी१ जमाल सूरत देखिये थिर नाहिँ बे ।
दम छ सै सहस इकइस२ हर दिन खजाने थैँ जाहिँ बे ॥२॥
मनी मारे गर्व गाफिल बेमेहर बेपीर बे ।
दरी खाना३ पड़े चोबा४ होइ नहीँ तकसीर बे ॥३॥
कुछ गाँठि खरची मिहर तोसा, खैर खूबीहा थीर बे ।
तजि बदवा५ बेनजर कमदिल, करि खसम कान बे ।
रैदास की अरदास सुनि, कछु हक हलाल पिछान बे ॥४॥
॥ ३७ ॥
सुकछु बिचार्यो तातैं मेरो मन थिर ह्वै गयो ।
हारे रंग लाग्यो तब बरन पलटि भयो ॥टेक॥
जिन यह पंथी पंथ चलावा ।
अगम गवन मेँ गम दिखलावा ॥१॥
अबरन बरन कहै जनि कोई ।
घट घट व्यापि रह्यो हरि सोई ॥
जेइ पद सुन नर प्रेम पियासा ।
सो पद रमिरह्यो जन रैदासा ॥२॥
॥ ३८ ॥
माधो संगत सरति६ तुमारी, जगजीवन किसन मुरारी ॥टेक॥
तुम मखतूल७ चतुरभुज, मैं बपुरो जस कीरा ।
पीवत डाल फूल फल अमृत, सहज भई मति हीरा ॥१॥
तुम चंदन हम अरँड बापुरो, निकट तुम्हारी बासा ।
नीच बिरिछ ते ऊँच भये हैं, तेरी बास सुबासन बासा ॥२॥
१ जोश । २ इक्कीस हज़ार छः सौ श्वास दिन रात में चलते हैं । ३ दरगाह ।
४ छड़ी की मार । ५ ठग । ६ मानी है । ७ श्रेष्ठ ।