रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८ )
॥ ३४ ॥
राम मैँ पूजा कहा चढ़ाऊँ ।
फल अरु फूल अनूप न पाऊँ ॥टेक॥
थनहर दूध जो बछरू जुठारी ।
पुहुप भँवर जल मीन बिगारी ॥१॥
मलयागिर बेधियो भुअंगा ।
बिष अमृत दोउ एकै संगा ॥२॥
मनही पूजा मनही धूप ।
मनही सेऊँ सहज सरूप ॥३॥
पूजा अरचा न जानूँ तेरी ।
कह रैदास कवन गति मेरी ॥४॥
॥ ३५ ॥
तुझ चरनारबिँद भँवर मन ।
पान करत मैँ पायो रामधन ॥टेक॥
संपति बिपति पटल माया घन ।
ता मैँ मगन होइ कैसे तेरो जन ॥१॥
कहा भयो जै गत तन छन छन,
प्रेम जाइ तौ डरै तेरो निज जन ॥२॥
प्रेमरजा१ लै राखो हृदै धरि,
कह रैदास छूटिबौ' कवन परि ॥३॥
॥ ३६ ॥
बंदे जानि साहिब गनी२ ।
समझि बेद कतेब बोलै काबे३ मैँ क्याँ मनी ॥टेक॥
स्याही सपेदी तुरँगी नाना रंग बिसाल बे ।
नापैद तैँ पैदा किया पैमाल करत न बार बे ॥१॥
१ आज्ञा वा प्रेम का रज अर्थात् धूर । २ बेपरवाह, धनी । ३ मुसलमानों का
तीरथ ।