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रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)

Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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पृष्ठ 24

कह रैदास खलास१ चमारा,
जो उस सहर सो मीत हमारा ॥५॥
( राग आसावरी )
॥ ३२ ॥
केसवे बिकट माया तोर, ताते बिकल गति मति मोर ॥टेक॥
सुविषंग सन कराल अहिमुख, ग्रसति सुटल सुभेष ।
निरखि माखी बकै ब्याकुल, लोभ कालर देख ॥१॥
इंद्रियादिक दुक्ख दारुन, असंख्यादिक पाप ।
तोहि भजन रघुनाथ अंतर, ताहि त्रास न ताप ॥२॥
प्रतिज्ञा प्रतिपाल प्रतिज्ञा चिन्ह, जुग भगति पूरन काम ।
आस तोर भरोस है, रैदास जै जै राम ॥३॥
॥ ३३ ॥
बरजि हो बरजिवी उतूले२ माया ।
जग खेयां महाप्रबल सबही बसं करिये,
सुर नर मुनि भरमाया ॥टेक॥
बालक बृद्ध तरुन अरु सुन्दर, नाना भेष बनावै ।
जोगी जती तपी सन्यासी, पंडित रहन न पावै ॥१॥
बाजीगर के बाजी कारन, सब को कौतिग३ आवै ।
जो देखै सो भूलि रहै, वा का चेला मरम जो पावै ॥२॥
षड ब्रह्मण्ड लोक सब जीते, येहि बिधि तेज जनावै ।
सब ही का चित चोर लिया है, वा के पीछे लागे धावै ॥३॥
इन बातन से पचि मरियत है, सब को कहै तुम्हारी ।
नेक अटक किन राखो कैसो, मेटो बिपति हमारी ॥४॥
कह रैदास उदास भयो मन, भाजि कहाँ अब जैये ।
इत उत तुम गोविन्द गोसाईं, तुमहीँ माहिँ समैये ॥५॥
१ खालिस । २ अतुल्य । ३ कौतुक ।
३