रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १६ )
मैं केई नर तुहिँ अंतरजामी ।
ठाकुर थैँ जन जानिये जन थैँ स्वामी ॥
तुम सबन में सब तुम माहीं ।
रैदास दास असमझि सी कहौँ कहाँ हीँ ॥३
॥ ३० ॥
या रामा एक तूँ दाना, तेरी आदि भेख ना ।
तूँ सुलतान सुलतानां, बंदा सकिसता१ अजाना ॥टेक
मैं बेदयानत न नजर दे, दरमंद२ बरखुरदार३ ।
बेअदब बदबखत बौरा, बेअकल बदकार ॥१॥
मैं गुनहगार गरीब गाफिल, कमदिला दिलतार४ ।
तूँ कादिर५ दरियावजिहावन६, मैं हिरसिया हुसियार ॥
यह तन हस्त खस्त खराब, खातिर अंदेसाबिसियार७ ।
रैदास दासहि बोलि८ साहिब, देहु अब दीदार ॥३॥
॥ ३१ ॥
अब हम खूब वतन घर पाया,
ऊँचा खेर९ सदा मेरे भाया ॥टेक॥
बोगमपूर सहर का नाम ।
फिकर अँदेस नहीं तेहि ग्राम ॥१॥
नहिँ जहाँ साँसत लानत मार ।
हैफ न खता न तरस जवाल ॥२॥
आव न जान रहम औजूद ।
जहाँ गनी१० आप बसै माबूद११ ॥३॥
जोई सैलि करै सोई भावै ।
महरम महल मेँ को अटकावै ॥४॥
१ टूटा हुआ, निर्बल । २ दरमांदा, आजिज । ३ अयाना । ४ सियाह दिल ।
५ समरथ । ६ भवसागर लँघाने या पार कराने वाला । ७ बहुत । ८ बुला कर ।
९ गाँव । १० बेपरवाह । ११ जिस की इबादत याने पूजा की जाय ।