रैदास जी की बानी (सन्त रविदास - बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सम्पूर्ण साखी व पद)
Raidas Ji Ki Bani: Belvedere Steam Printing Press Allahabad
सन्त रविदास / रैदास (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 22, कुल 52 में से
संदर्भ में पढ़ें( १५ )
बीस बरस का भया अयाना, थाँभि न सका भाव बे ।
जन रैदास कहै बनिजरिया, जनम लिया संसार बे ॥३॥
दूजे पहरे रैन दे बनिजरिया, तूँ निरखत चाल्यौ छाँह बे ।
हरि न दमोदर ध्याइया बनिजरिया, तैँ लेय ना सका नाँव बे ॥४॥
नाँव न लीया औगुन कीया, जस जोबन दै तान बे ।
अपनी पराई गिनी न काई१, मंद करम कमान२ बे ॥५॥
साहिब लेखा लेसी तूँ भरि देसी, भीर परै तुझ ताँह बे ।
जन रैदास कहै बनिजरिया, तूँ निरखत चाला छाँह बे ॥६॥
तीजे पहरे रैन दे बनिजरिया, तेरे ढिलड़े पड़े पिय प्रान बे ।
काया रविनि का करै बनिजरिया, घट भीतर बसे कुजान बे ॥७॥
एक बसै कायागढ़ भीतर, पहला जनम गँवाय बे ।
अबकी बेर न सुकिरित कीया, बहुरि न यह गढ़ पाय बे ॥८॥
कंपी देह कायागढ़ खाना, फिरि लागा पछितान बे ।
जन रैदास कहै बनिजरिया, तेरे ढिलड़े पड़े परान बे ॥६॥
चौथे पहरे रैन दे बनिजरिया, तेरी कंपन लागी देह बे ।
साहिब लेखा माँगिया बनिजरिया, तेरी छाड़ि पुरानी थेह३ बे ॥१०॥
छाड़ि पुरानी जिह अजाना, बालदि४ हाँकि सबेरियाँ बे ।
जम के आये बाँधि चलाये, बारी पूगी५ तेरियाँ बे ॥११॥
पंथ अकेला बराउ६ हेला, किस को देह सनेह बे ।
जन रैदास कहै बनिजरिया, तेरी कंपन लागी देह बे ॥१२॥
॥ २९ ॥
देवा हमन पास करंत अनंता,
पतितपावन तेरा बिरद क्यों कहंता ॥टेक॥
तोहिँ मोहिँ मोहिँ तोहिँ अंतर ऐसा ।
कनक कटक७ जल तरंग जैसा ॥१॥
१ कोई। २ कमाया। ३ सहारा। ४ बरधौ। ५ पारी पूरी हो गई। ६ बराओ,
चुनलो। ७ कड़ा।