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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 416, कुल 470 में से

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पृष्ठ 416

४०६ पृथ्वीराजरासो । [ मघां समय २२
पृथ्वीराज का सवार होना ॥
कवित्त ॥ चितं ईस चहुंआन । चल्यौ हय सज्जि सुआवध ॥
बोलि सूर सामंत । बान सज्जे सुबान जुध ॥
जय हर ! जंपे राज । चल्यौ थप्परि है कंधं ॥
जै मन्त्रिय है राव । करी कसि मुष जरहं ॥
धुंइंत धरा धुर धुर बिछर । करिय लोह दंतै कसक ॥
नाचंत तेन पैरव सुथल । धरनि ध्यंम धुज्जिय धसकि ॥
छं० ॥ ११३ ॥ रु० ॥ ६० ॥
पृथ्वीराज का मीरहुसैन के डेरे में आना, मीरहुसैन
का अपने साथियों के साथ तयार होकर पृथ्वी-
राज को सलाम करना ॥
कवित्त ॥ गयौ राज चहुआन । साच डेरा हुस्सेनह ॥
सुनी खबरि बर बीर । सज्जि आयौ सध्यै सच ॥
करि गोसल्ल पविच । हेडू चिंत्ते रहमानं ॥
बंधि सिलह है संगि । बीर बज्जे नीसानं ॥
चढि दाह सज्जि सथ्थिय सयन । सीस नम्मि सलाम किय ॥
देषे सुबीर विक्कसे सुमन । बर सनमान अतित किय ॥
छं० ॥ ११४ ॥ रु० ॥ ६१ ॥
पृथ्वीराज और मीरहुसैन के मिलकर चलने का वर्णन ॥
छंद गीता मालती ॥ चढि चल्यौ राजं सेन साजं, बीर बाजं बज्जाए ॥
नहं निसानं सजे बानं, गोम गानं गज्जाए ॥
फौजे छक्ककी बीर बक्की, सूर जक्की जंभरं ॥
बिरदैत बीरं जुद्ध धीरं, आय भीरं धर घरं ॥ छं० ॥ ११५ ॥
६० पाठान्तर-है। सजि । सूर सब्वान । बांन । सबांन । जुहु । जै । हय । मंत्री । उरधं ।
करिय । दंत लोहं । पयरख । धरनि ताम । धुजिय ॥
६१ पाठान्तर-चहुवांन । हुसेनह । सजि । सध्यैं । चिंत्यौ । बजे । निसांनं । सज । सथी ।
नांमि । सलाम । सनमांन । अतित ॥