पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३७६ पृथ्थीराजरासो । [ आठवां समय ८
कैमास का पठान बाजीदखां से जुद्ध ॥
कवित्त ॥ वाम अंग पठान । विरचि बाजीद † सुपंनिय ॥
उन उप्पर कैमास । हुकम प्रथीराज सुदिंनिय ॥
सीस नांपू बल बाहू । जाइ लग्गिय घन रोसन ॥
तीर तुषक्क तरवारि । तच्छि निकरै उर ओरन ॥
अबरद्द नद्द नीसान धुनि । लगी लाग मारु बजन ॥
रन तूर तूर तवलन चक्क । गहक धक्क रज्जे रजन ॥
छं० ॥ ३५ ॥ रू० ॥ २२ ॥
कूरंभ से राम गूजर का युद्ध ॥
कवित्त ॥ दख्खिन दिसि कूरंभ । नांम नरेन निथदिय ॥
तिन पर गुज्जर राम । करन दस दूवस वदिय ॥
समर अमर परैं सूर । चंपि जनु जांनि उद्भारिय ॥
लोए उच्चरि बुड़ि जाँचि । मुररि मरदांन मुक्कारिय ॥
अन भंग अंग तन तन तकहिँ । हकहिँ बकहिँ बज्जहिँ सखिय ॥
अनभूम भूत भिरैं भूत भुव । समर श्रोन सरिता चखिय ॥
छं० ॥ ३६ ॥ रू० ॥ २३ ॥
इतने में पृथ्वीराज का रण के बीच अचानक जा पहुँचना
और घोर युद्ध का होना ॥
छंद भुजंगी ॥ जयं जाय पत्तौ प्रथीराज जुद्धं । करी सब्ब सेना बिरुद्दं बिरुद्दं ॥
२२ पाठान्तर-वाम । पठांन । सुयं । नीय । प्रथीराज दनियं । नांह । बाहूं । लाइं । तबक ।
तरवार । निकसै । उंरन । नीसांन । हक्क । रंजे ॥
† बाजीदखां नामक पठान मुद्गलराय का एक बड़ा लड़ाका सेनापति अर्थात् जनरल
था और परदेशी सिपाही उसके विभाग में थे । यह वृत्त इस महाकाव्य में जो मुसलमानी भाषा
के शब्द आते हैं उनके विषय की शंका मिटाने के लिये बड़ा उपयोगी है ॥
२३ पाठान्तर-दखिन । दिशि । नांम । नरि ननिवट्टिय । गुजर । रांम । दूबल । वटिय । परे ।
परे । जांनि । लोहरि । जांहि । मरदांव । मुकारीय । तकहिं । बकहि । हकहिं । भिरें । भुय । झलिय ॥