पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary
महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा
पृष्ठ 385, कुल 470 में से
संदर्भ में पढ़ेंआठवां समय ७ ] पृथ्वीराजरासो । ३०५
जनु कि गरुड़ मन्त्र गज्जि । वज्जि पंनग बहु पारन ॥
तिम सूर झपटि सोमेस सुन्न । जनु अकास तारक तूटिय ॥
सम जोर रोर अरि उड्डवन । सार सार सचुन जुटिय ॥
छं० ॥ ३१ ॥ रू० ॥ १८ ॥
कवित्त ॥ उन मुंगल गहि इंद । इंद देवन जनु पारस ॥
हर दल कर वन्न कोर । गोड मंडिय भर भारस ॥
गहिर गुंज नीसांन । आंनु वहल गुर गज्जिय ॥
वरन वरन वैरप्प । इंद धनुषह सम रज्जिय
द्वय नारि धारि आतस अनँत । सेार रोर चंमर उड़िय ॥
जाने कि विरचि वारधि लहरि । सत्ति म्रजाद बूडन कुटिय ॥
छं० ॥ ३२ ॥ रु० ॥ १६ ॥
ऐसे पृथ्वीराज के अन्य सूर मुङ्गल के योद्धाओं से लड़े ॥
गाथा ॥ इम रंजे रन रंगं ॥ सूरं नूरं अंगं अमितायं ॥
जनु * विरचे महिष महिंद्रं ॥ वज्जं पात घाव अंगायं ॥
छं० ॥ ३३ ॥ रु० ॥ २० ॥
कन्ह का मेवातियों से युद्ध ॥
कवित्त ॥ उसन्नंग दर धौर । ठौर रप्पन सेवातिय ॥
सीस नाइ मुंगल नरिंद * । कछर कृष्यौ घन घातिय ॥
हूंत सु कन्ह नरनाह । दाह दावावल जह्निय ॥
धक्क वक्क धरि धक्क । जानि मचना रँभ झल्लिय ॥
पय हुंत मंत उरझे जनुकि । मेछ बूंद सर कर कुटिय ॥
सरजाल चाल अनहद अवनि । तिमिर पसर रविकर मिटिय ॥
छं० ॥ ३४ ॥ रु० ॥ २१ ॥
१८ पाठान्तर-कर । करिन । जुथ । अंजनी । दिषि । हथ धर । गनि । बजि । तिम सु सूर सोमेस सुन्न । जुटिय । उड्डयन ॥
१६ पाठान्तर-मही । गहर । नीसांन । जांनु । रञ्जिय । जांनै । म्याद ॥
२० पाठान्तर-सूर । नूर । अंग । * अधिक पाठ है । महिंद्रं ॥
२१ पाठान्तर-ठौर। ठौर । मेवातीय । नांह । मुंगल । * अधिक पाठ है । घातीय । जलिय । जानि । रंभ । झलिय ॥