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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

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पृष्ठ 373

सातवां समय ३५ ] पृथ्वीराजरासौ । ३६३
गुज्जर वै परधान । जैन धुम्मी मत लड्ढी ॥
एकादस चहुआन । धर धारह आलुड्डी ॥
सहस एक असवर । धार वै गै घर मंड्यौ ॥
नाहर राइ नरिंद । कोट पहन वै चढ़क्यौ ॥
ढुंढयौ षेत चहुआन बर । अरु भारथ आहुह्यौ ॥
चामर सु कवच धरि षेत में । सुधा विविध विधि लुह्यौ ॥
छं० ॥ १६७ ॥ रु० ॥ १०४ ॥
डोला पंच पचीस । स्वामी संजुत्त चढाइय ॥
घाइ कन्ह घट घुम्मि । घाइ एकादस राइय ॥
चंपि बीर चालुक्क । राज मेलान तुच्छ करि ॥
गल गज्जै सामंत । बरै बरनी नाहर बरि ॥
रविवार बीर पंचमि दिवस । एकादस रविभुअन ग्रह ॥
अष्टम सु चक्र जोगिनि ग्रहण । बर बज्जेति नरिंद तह ॥
छं० ॥ १६८ ॥ रु० ॥ १०५ ॥
पट्टन में पृथ्वीराज का राज्याभिषेक होना ॥
देव दसमि कै दीह । नयर पहन चहुआनं ॥
गुर पंचम रवि नवम । सुवर ग्यारह ससि धानं ॥
तीय थान बर भौम । सुक्र सप्तम बल किन्ना ॥
केंद्री बर बुद्ध । राह सब कौंद अहिन्ना ॥
आनंद चंदं बरदाइ घन । राजभिषेकन पहि करि ॥
साजंत भूमि जीते सुपत्ति । तेज तुंग दुज्जन सुहरि ॥
छं० ॥ १६९ ॥ रु० ॥ १०६ ॥
१०४ पाठान्तर—गुज्जर । परघांन । धुंम्मो । धुमी । चहुवांन । आलुही । नाहरराय । चढ्यौ ।
चहुवांन । आहुट्यौ । लुट्यौ ॥
१०५ पाठान्तर—डोंला । स्वांमी । स्वांमि । घाय । घूंमि । घुंम्मि । धाय । ईकादस ।
मेलांन । तुछ । बरैं । बरौ । बजेति ॥
१०६ पाठान्तर—चहुवांनं । चहुआनं । यांन । कीनो । केंद्री । सबकोद अहिना । बरदय
धनं । पट । दुजन ॥