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पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

पृथ्वीराज रासो (सटीक हिन्दी व्याख्या)

Prithviraj Raso by Chand Bardai with Hindi Commentary

महाकवि चन्दबरदाई / कविराज मोहनसिंह द्वारा

DevanagariHindipublished470 पृष्ठ

पृष्ठ 374, कुल 470 में से

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पृष्ठ 374

३६४ पृथ्वीराजरासो । [ सातवां समय ३६
दूहा ॥ तिरिय वक्र अधचक्र नन । ऊरध वक्र प्रमान ॥
पून नखिच चहुआन वै । पट अभिषेक समान ॥
छंद ॥ १७० ॥ छ० ॥ १०७ ॥
कवित्त ॥ पून नखिच कविचंद । कौन वान् उपावै ॥
पटभिषेक राजान । बहुत आगम प्रभावै ॥
ग्रच प्रसाद * तोरन उतंग । कूच जंचह सक ठावै ॥
ध्वजा बंधि पत्ताक । संष चामर मंडावै ॥
उद्यत्त परब पनि अर्चन । बहु विवेक घंमच सुधरि ॥
नन कूप तडागन वापियन । धन सुकियन सुकियन बरि ॥
छंद० ॥ १७१ ॥ छ० ॥ १०८ ॥
नाहरराय का हारकर अपनी कन्या के विवाह का
लग्न लिखवाकर भेजना ॥
छंद पहरि ॥ सब सथ्थ तथ्य हुअ एक ठांम । मुक्कांम कीन गिरिनार गांम ॥
सब लोक महाजन मिले आइ । चिंत्यौ सुचित्त नाहर सुभाइ ॥छं॥१७२॥
जिणि मेल होइ सो करि उपाइ । दिप्पियै दीप ल्हो नहीं खाइ ॥
पहुमी सुकाज अर तजत प्रान। पहुमीस काज धन देत दान ॥ छंद॥ १७३ ॥
पहुमीय काज जग बाजि देत । उपाइ नेक पहुमी सुलेत ॥
पुत्री सुएक तिन तन कुआरि । दीसंत देह जनु मदनधारि ॥ छंद ॥ १७४ ॥
बुल्लाइ विप्र लिखि लगन तथ्य । पठाइ दीन नृप पिथ्थ जय्थ ॥
आनंद राज सब सेन अंग । फुल्ले कि कमल जनु दिषि पतंग ॥
छंद० ॥ १७५ ॥ छ० ॥ १०९ ॥
१०७ पाठान्तर=तिरीय । प्रमाणं । चहुआन कौं । पटभिषेक । समांन ॥
१०८ पाठान्तर-कौन । उपावै । पाट विभेक रजांन । पाटभिषेक राजांन । आरांम ।

  • अधिक पाठ है ॥ उतंग । पताक । उदयं । उद्यंत । पांनिं । पांनि । घुंम्मह । तटांकने । धन
    मुकियन मुकियन वरि । मुकियन चुकियन वर ॥
    १०९ पाठान्तर-सब्ब । सर्थ । तथ । हूष । ठांम । मुकाम । गिरनारि । गांम । सब्ब । मिलियं ।
    आय । चिंत्यौ । सुभाय ॥ १७२ ॥ जिंहिं । होय । उपाय । दिषियै । नही । लाय । पुहमी । प्रांन ।
    दांन ॥ १७३ ॥ उपाय । कुवार । धार ॥ १७४ ॥ बुलाय । तच्छ । पठाइ । पिथ । जय । फूले ॥ १७५ ॥