प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)

प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
DevanagariHindipublished318 पृष्ठ
पृष्ठ 61, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 61
वासुदेव के सिक्कों की दोनों ओर ग्रीक लेख ही हैं; गा; कँ. कॉ. ग्री. सी. किं. बा. इं; सेट २५-२६. हा; कँ. कॉ. पं. म्यू; जि. १,
Wait, look at line 4:
कुजुलकर कडफसिस और वेम कडफसिस इन तीन के सिक्कों पर खरोष्ठी लेख मिलते हैं और कनिष्क, हुविष्क और वासु-
देव के सिक्कों की दोनों ओर ग्रीक लेख ही हैं; गा; कँ. कॉ. ग्री. सी. कि. बा. इं; सेट २५-२६. हा; कँ. कॉ. पं. म्यू; जि. १,
Wait, किं. or कि.?
In line 4 of note 5: ग्री. सी. कि. बा. इं; - look at कि., it does not have anusvara (or very faint). Let's check: in note 1 it was किं., in note 4 किं., here कि.. Let's keep it accurate: किं. or कि..
Next line:
सेट १७-२०. स्मि; कँ. कॉ. ई. म्यू; सेट ११-१४.
- Footnote 6:
`६. औदुंबर और कुनिंदवंशी राजाओं के पंजाब से मिलने