प्राचीन भारतीय लिपिमाला (महामहोपाध्याय गौरीशंकर हीराचन्द ओझा - लिपि-विज्ञान व कूट-पठन)
The Paleography of India by G.H. Ojha
रायबहादुर पण्डित गौरीशंकर हीराचन्द ओझा द्वारा
पृष्ठ 247, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंPlate XX.
लिपिपत्र २०वां.
मेवाड़ के गुहिलवंशी राजा अपराजित के समय के कुण्डेश्वर के लेख से.
(वि. सं. ७१८ = ई. स. ६६१).
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[वर्ण-चिह्न]
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[वर्ण-चिह्न]
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[वर्ण-चिह्न]
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[वर्ण-चिह्न]
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[वर्ण-चिह्न]
[सिद्धम्] जितमुरुभिररीणामीतिभिश्चापहर्तुर्जगति विदितधाम्नः श्रीयशोशोभितायाः ।
सकलमपि कलङ्कं यस्य नैवाभ्युपैति प्रवरगुणगरिष्ठाः केवलं संश्रयन्ति ॥
भुवि रविमवधूय द्योतमानो दिशो याः पृथुतरयशोभिर्नित्यमापूर्य लोकम् ॥ जयति वि-
जितारिः श्रीपराधीतनामा समरभरधरायां यस्य वैरी विदूरे । उप-
हसित इव बाष्पं मुञ्चति प्राप्तखेदः स्वयमवनतमौलिर्म्म्लेच्छभावं प्रपन्नः ॥
तदनु समनुजाते श्रीवराहेण तस्याः प्रथित...
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