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परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

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३१८ ६८ आयु स्तर के उल्लास के
विशिष्ट समयाचार २६३-२६४
३१९ ६९ अवशिष्ट उपासक धर्म २६४-२६५
३२० ७० आठ पाशों का अवसादन २६५
३२१ ७१ अन्य धर्म २६५-२६६
३२२ ७२ अभ्यर्हितों का आदर २६६
३२३ ७३ प्रकाश की विभावना २६६
३२४ ७४ स्वार्था, गुर्वर्था धारणा २६७
३२५ ७५ गुरु द्वारा उक्त ही कार्य २६७
३२६ ७६ अविचारणीय आदेश २६७
३२७ ७७ सत्य-पालन-दृढता २६८
३२८ ७८ परदार-धन में अनासक्ति २६८
३२९ ७९ आत्मश्लाघा आदि वर्जित सात व्यवहार २६८
३३० ८० सामयिक मुख्य धर्म २६८-२६९
३३१ ८१ शास्त्रान्तर में अनुशिष्ट धर्म भी ग्राह्य २६९
३३२ ८२ कुल-मार्गनिष्ठ की प्रशंसा २६९-२७०
३३३ ८३ दशखण्डी इस महोपनिषद् के अध्येता
की प्रशंसा २७०-२७१
३३४ ८४ पाँच अव्यय शब्दों से पाँच खण्ड
का आकलन २७१-२७२
३३५ ८५ ग्रन्थकार-स्तुति, वृत्तिकार-परिचय, ग्रन्थ-
रचनाकाल २७२-२७३

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