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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 320 में से

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पृष्ठ 43

परशुरामकल्पसूत्रम्
दीक्षाविधिः
[ प्रथमः खण्डः ]
इह खलु श्रीभगवान् परशुरामस्तुरीयपुरुषार्थसाधनं
लघुमध्वानं दर्शयन् प्रतिजानीते—
अथातो दीक्षां व्याख्यास्यामः ।।१।।
अत्र अथशब्दः मङ्गलद्योतकः। अतःशब्दश्च आनन्तर्यद्योतकः। दीक्षा-
पदार्थं सूत्रकारोऽग्रे विवेचयिष्यति। व्याख्यापदार्थश्च निगूढाभिप्रायकशब्दस्य
विविच्य कथनम्। प्रकृते गूढार्थानां तन्त्राणामुपसंहारेण विविच्य कथनं कल्पसूत्रे
इति लक्षणसमन्वयः।।१।।
परशुरामकल्पसूत्र का यह प्रथम सूत्र है। इसमें चार शब्दों का प्रयोग किया
गया है— १. अथ, २. अतः, ३. दीक्षां और ४. व्याख्यास्यामः। अथ शब्द
मङ्गलवाचक है। प्रारम्भ में विषयप्रवर्त्तन 'अथ' शब्द से करने की भारतीय परम्परा
है। उसी का अनुसरण यहाँ किया गया है। अतः शब्द आनन्तर्य का बोधक
है। इसके पहले के कार्य की समाप्ति और उसके बाद नये कार्य के प्रारम्भ
की प्रवृत्ति का आकलन इससे होता है। दीक्षा आँख में अञ्जन की तरह
सर्वदोषनाशिका परमार्थपरिष्कारिका गुरुतः प्राप्त मन्त्रादि-वरद प्रक्रिया है। ग्रन्थ
में आगे चलकर इसका स्पष्टीकरण करेंगे। व्याख्या गूढ अभिप्राय से भरे शब्दों
का विवेकपूर्ण निर्वचन करती है। सूत्र में वर्तमान की उपेक्षा कर भविष्यत् प्रयोग
अभिप्रायगर्भ प्रयोग है।।१।।
भगवान् परमशिवभट्टारकः श्रुत्याद्यष्टादशविद्याः सर्वाणि
दर्शनानि लीलया तत्तदावस्थापन्नः प्रणीय संविन्मय्या भगवत्या