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परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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( २७ )
२९३ ४५ आज्ञा में भूदारमुखी २५०
२९४ ४६ वाराही विद्या २५०-२५१
२९५ ४७ श्रीपूर्त्ति विद्या (ब्रह्मरन्ध्र) २५१
२९६ ४८ महापादुका विद्या २५१-२५२
२९७ ४९ महासिद्धिप्रदायिनी (द्वादशान्त) २५२
२९८ ४९ अविद्यालयकर्त्री २५२
२९९ ५० रश्मिमालामन्त्र-प्रयोक्ता ही परमशिव २५२
३०० ५१ ललिता-जपविघ्ननिवारक मन्त्र २५३-२५४
३०१ ५२ श्यामाजपविघ्नहर मन्त्र २५४
३०२ ५३ वाराही-जपविघ्नहर मन्त्र २५४
३०३ ५४ उक्त मन्त्र जपारम्भ में ही जप्य २५४-२५५
३०४ ५५ ललिता, श्यामा, वार्त्ताली और परा विद्याओं
के जप समय २५५
३०५ ५६ मपञ्चक प्रातिनिध्य हेतु २५५-२५७
३०६ ५७ उपासक धर्म सर्वभूताविरोध २५७
३०७ ५८ परिपन्थियों का निग्रह २५७
३०८ ५९ संश्रितों पर अनुग्रह २५८
३०९ ६० गुरुपुत्र-कलत्र में गुरु भाव २५८
३१० ६१ दोषप्रद पदार्थ का त्याग २५८-२५९
३११ ६२ आदिम द्रव्य की ग्राह्यता का विमर्श २५९-२६०
३१२ ६३ पञ्चमकार-ग्राह्यता का विमर्श २६०
३१३ ६३ मकार के पाँचों द्रव्य २६१
३१४ ६४ कुलाचार धर्म-प्रवृत्ति २६१-२६२
३१५ ६५ दश कुलवृक्ष रक्षणीय २६२
३१६ ६६ विशिष्ट धर्मान्तर २६२-२६३
३१७ ६७ पञ्चपर्व की विशेष अर्चायें २६३