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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

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( २१ )
१५४ ३७ जप आदि, ब्राह्मण भोजन १६३-१६४
१५५ ३८ मन्त्रजप कर्त्ता के धर्म १६४
१५६ ३९ ललितोपासक धर्म १६४-१६५
सप्तमः खण्डः वाराही क्रमः १६६-१९७
१५७ १ श्रीललिता त्रिपुरसुन्दरी की दण्डनायिका
वाराही की उपासना-विधि का उपक्रम १६६
१५८ २ महासत्र की परिभाषा और उसमें अनाहत
ध्वनि का अवमर्श १६६-१६७
१५९ ३ गुरुनमस्कार और मूर्धा में अञ्जलि का विधान १६७-१६८
१६० ४ सभी मन्त्रों के साथ इस क्रम में 'ग्लौं'
बीजमन्त्र का प्रयोग १६८-१६९
१६१ ५-६ लिङ्ग-देह-शोधन, इसके छः मन्त्र, शाम्भव-
शरीरोत्पादन, भूतशुद्धि १६९-१७०
१६२ ७ मातृका-सम्पुटित बीजन्यास १७०-१७२
१६३ ८ अङ्गुलिन्यास १७१-१७२
१६४ ९ हृदयादिन्यास १७२-१७३
१६५ १० आत्मालङ्करण १७३
१६६ ११ अर्घ्यशोधन १७३-१७४
१६७ १२ अर्घ्यशोधनानन्तर करणीय न्यास १७४-१७७
१६८ १३ तत्त्वन्यास १७८
१६९ १४ देवीध्यान १७९
१७० १५ चक्रनिर्माण १७९-१८०
१७१ १६ चक्रकर्त्तव्य १८०-१८१
१७२ १७ चक्रमन्त्र १८१
१७३ १८ मण्डलादियजन, तत्त्वमन्त्र, गुणमन्त्र और आत्म-
मन्त्र— यहाँ तक सत्ताइस पीठ पूजन पूर्ण १८१-१८२