परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary
भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा
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१७४ १९ चक्र के ऊपर देवी के आसन का विमर्श १८२
१७५ २० मूर्तिकरणी विद्या १८२-१८३
१७६ २१ आवाहनादि ९ मुद्राओं का प्रयोग १८३
१७७ २२ षडङ्ग-पञ्चाङ्ग न्यास १८४
१७८ २३ षोडशोपचार १८४
१७९ २४ देवी का ध्यान १८५
१८० २५ देवी का तर्पण १८५
१८१ २६ आवरण पूजा (प्रथम) १८५-१८६
१८२ २७ द्वितीय आवरण पूजा १८६
१८३ २८ तृतीय आवरण पूजा १८६-१८९
१८४ २९ तृतीयावरण पूजा पूर्ण १८९
१८५ ३० चतुर्थावरण पूजा १८९-१९०
१८६ ३१ पञ्चमावरण पूजा १९०-१९१
१८७ ३२ षष्ठावरण पूजा १९१-१९२
१८८ ३३ देवी का सन्तर्पण एवम् उपचरण १९२-१९३
१८९ ३४ बलिदान प्रकार १९३-१९४
१९० ३५ गुरु सन्तुष्टि का विधान १९४
१९१ ३६ शक्ति आदि की पूजा १९४-१९५
१९२ ३७ हवन मन्त्र साधन १९५-१९६
१९३ ३८ पूजा, शेष कृत्य १९६-१९७
अष्टमः खण्डः पराक्रमः १९८ · २१२
१९४ १ पराबीज और विद्या की एकरूपता के
अवमर्शपूर्वक पूजा का निर्देश १९८
१९५ २ उपासना हेतु १९८-१९९
१९६ ३ अनुत्तर पद्धति-कथन की प्रतिज्ञा १९९