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सर्वकोश
परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

परशुराम कल्पसूत्र (महर्षि परशुराम - आचार्य विद्यानिवास मिश्र सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Parasurama Kalpasutra with Vidya Niwas Mishra Commentary

भगवान् परशुराम (टीकाकार: प्रो. विद्यानिवास मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished320 पृष्ठ

पृष्ठ 132, कुल 320 में से

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पृष्ठ 132

९० परशुरामकल्पसूत्रम्
आदियेषां वर्णानां दीर्घकारखकारदकारप्रभृतीनां तन्मयास्तदभिन्ना रेखा यस्मिन्
त्रिकोणे तद् अकथादिमयरेखम्। इदं त्र्यस्रविशेषणम्। हश्च लक्षयुगं च तयोः
अन्तः मध्ये स्थितो यो हंस इति वर्णसमुदायस्तेन भास्वरं, द्रव्ये स्वदक्षभागे
‘हम्’ इति विलिख्य, तदुत्तरतो हं स इति वर्णौ विलिख्य तदुत्तरतो लक्षेति
विलिखेत्, एवं चोक्तरूपं भवति। एवं वाक्कामाशक्तयः, तद्युक्तं त्रिकोणं
विलिख्य हंसेन हंस इति मन्त्रेण आराध्य पुष्पादिभिः पूजयित्वा
बहिस्त्रिकोणानि मूलषडङ्गमन्त्रैः पुरोभागादि-स्वाभिमुखाग्रादिप्रादक्षिण्‍येन
अभ्यर्च्य मूलेन सप्तधा सप्तवारमावृत्तेन। तस्मिन् द्रव्ये दत्ता अर्पिता
गन्धाक्षतपुष्पधूपदीपा येन ईदृशः पूजको भवेत्। सर्वविद्या परसंवित् तन्मयं
तदभिन्नं कृत्वा भावयित्वा चतुर्नवतिमन्त्रान् जपेत् ।।२५।।
सर्वप्रथम पूर्वोक्त प्रकार से द्रव्यादि में पूजन कर सूत्रोक्त निर्देश पालन
करना चाहिये। सूत्रानुसार पूजन के उपरान्त वहाँ एक त्रिकोण की संरचना करनी
है। इस कोण का नाम ‘अकथादिमयरेख’ रखा गया है। इसका कारण है त्रिकोण
में तीन रेखायें होती हैं। ज्यामिति के अनुसार इस कोण को अकथ कोण कह
सकते हैं। तीनों रेखाओं के नाम १. अक, २. कथ और ३. थअ या अ-थ
रेखा कहा जा सकता है। अ-क रेखा पर अ से लेकर विसर्ग पर्यन्त १६ स्वर
लिखे जाते हैं। रेखा पश्चिम से ईशानकोण तक बनायी जाती है। दूसरी रेखा
ईशान से अग्निकोण तक जाती है। इसमें ‘क’ कोण से कवर्ग, चवर्ग, टवर्ग
के १५ अक्षर और ‘त’ अक्षर मिलाकर १६ वर्ण लिखे जाते हैं। तीसरी रेखा
‘थ’ अक्षर से प्रारम्भ होती है। इसे थ-अ रेखा कह सकते हैं। इस पर ‘थ’
से ‘अ’ तक १६ वर्ण लिखे जाते हैं। इसमें तवर्ग के ४, पवर्ग के ५, यवर्ग
के ४ और ऊष्मा के तीन वर्ण मिलाकर १६ वर्णों की एक रेखा होती है।
ईशानकोण क --------------------------------------------- थ अग्निकोण
कवर्ग ५ | चवर्ग ५ | टवर्ग ५ | त १
१६ स्वर थ दधन ४ वर्ण
पवर्ग ५ वर्ण
हं हंसः क्षं अन्तस्थ ४ वर्ण
ऊष्मा श ष स ३ वर्ण
अ पश्चिम