पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)
Panchasayaka of Kavishekhara Jyotirishvara with Commentary
कविशेखर ज्योतिरीश्वर (सम्पादक: पं. श्रीधर शास्त्री) द्वारा
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पद्मिनीमन्त्रस्तम्भन | [२९] रोमशातनसमुद्देश ४७
प्रकारश्च ४३ (क) | भुजङ्गतैलप्रयोग ” ६९
[२२] चित्रिणीमन्त्र- | तालकादिचूर्णम् ” ७०
समुद्देशः ” | शङ्खभस्मप्रयोगः ” ७१
चित्रिणीमन्त्रस्तम्भन | [३०] स्मरमन्दिर
प्रकारश्च ” (ख) | पुष्पसमुद्देश ”
[२३] शङ्खिनीमन्त्र- | ज्योतिष्मतीपत्रप्रयोग ४८ ७२
समुद्देशः ४४ | [३१] गर्भधारणसमुद्देश ”
शङ्खिनीमन्त्रस्तम्भन | (क) अश्वगन्धागाभिनदुग्ध-
प्रकारश्च ” (ग) | विधानम् ” ७३
(२४) हस्तिनीमन्त्र- | लक्ष्मणामूलप्रयोग ” ७४
समुद्देश ” | बीजपूरमूलप्रयोगः ४९ ७५
हस्तिनीवशीकरणमन्त्रस्त- | (ख) कशेरुकादिशानितदुग्धप्रयोग ” ७६
म्भनप्रकारश्च ” (घ) | [३२] सुखप्रसवमन्त्र-
(२५) अनिच्छाहरण | समुद्देशः ”
समुद्देश ४५ | त्रयःसुखप्रसवमन्त्राः ,, ७७-७९
अनिच्छाहरणोपाय ” ५२ | व्याघ्रमुखप्रसवमन्त्रः ५० ७९
(२६) मन्मथोत्थापन | ललनास्नानं ” ८०
समुद्देश ” | [३३] वन्ध्याकरणसमुद्देशः ५१
मानदृक्चूर्णादिप्रलेप ” ५३ | पलाशबीजाद्यवशनम् ” ८१
भुजङ्गवादिशनम् ” ५४ | कदम्बफलप्रयोग ” ८२
दाडिमीर्त्तनावेशनम् ” ५५ | राक्षसगन्धाद्यप्रयोगः ” ८३
(२७) पतितमन्मथोत्था- | [३४] केशसंस्कार-
पनसमुद्देश ४६ | समुद्देशः ”
कूर्प्पासराशनम् ” ६६ | तिलप्रसूनादिप्रलेपः ” ८४
[२८] योनिसंस्कार | निर्मलीकरणप्रयोग ५२ ८५
समुद्देश ” | [३५] इन्द्रलुप्तसमुद्देश ”
योनिरोपनप्रकारः ” ६७ | गुञ्जाफलप्रयोगः ” ८६
जातिप्रसूनप्रक्षेपः ” ६८ |