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सर्वकोश
पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)

पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)

Panchasayaka of Kavishekhara Jyotirishvara with Commentary

कविशेखर ज्योतिरीश्वर (सम्पादक: पं. श्रीधर शास्त्री) द्वारा

DevanagariSanskritpublished109 पृष्ठ

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( २ )
पृ. प. अशुद्धम् शुद्धम् | पृ. प. अशुद्धम् शुद्धम्
,, १८ विज्ञापना विज्ञायते | ४८ ४ श्रुति रतिः श्रुतिराम्भः
,, २० पाठम्हास्या पाठस्यास्या | ,, १६ विधना विर्धना
,, ,, मून एव गून एव | ५७ १७ दुग् दुग्ध
३७ १६ मनोन्तानरम् मनान्तानरम् | ५४ १० नात्क्षिमिला तत्क्षिमिला
३६ ७ गोर्णासुतेन गार्गीपुतेन | ५६ ८ मम्थापन संस्थापन
४१ ३ चामुग्डमन्त्रः चामुण्डामन्त्रः | ,, २३ रुन्गारार्दी शृङ्गारार्दी
४२ ८ भरतारी भयरारी | पञ्चम.सायक.
४३ १७ इन इति | ६६ १ चतुन सायकः पञ्चम सायकः
४९ १७ ध्रवातु ध्रुवास्तु | ७१ १० स्यादाप स्थादाय
५० १७ मुख्यप्रभव सुखप्रसव | ७२ ६ पादा पादा
चतुर्थ.सायकः | ७३ ७ स्तिनया हि्रताया
५४ १ रुच्चाह्नो रुचाह्नो | ,, २० पुस्तर्रीय पुस्तर्कीय
५५ ३ सृणोरपद ऋगम्पद | ७४ १२ इति इति
,, १७ उद्दार्डांत उद्दोडयि | परिशिष्टम्
,, १८ तन्नायलभ्यते तन्नांपन्लभ्यत | ८० १३ पश्चम पञ्चम
५६ ,, गदनायक गृट्नायक | ,, १७ पाटनय पाठश्रयं