पञ्चसायक (कविशेखर ज्योतिरीश्वर - कामकला एवं रति-शास्त्र संस्कृत मूल पाठ)
Panchasayaka of Kavishekhara Jyotirishvara with Commentary
कविशेखर ज्योतिरीश्वर (सम्पादक: पं. श्रीधर शास्त्री) द्वारा
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पञ्चमसायकस्याऽशुद्धिपत्रम् ।
पृ. पं. अशुद्धम् शुद्धम् | पृ. पं. अशुद्धम् शुद्धम्
१ ६ नोदया नोदयाः | ८ १८ शिनिनन तिमिरम्
” १६ फालाना फलाना | ६ १ पूर्णमास्या पूर्णमास्या
२ ७ प्रणेतारा प्रणेतारौ | ” ११ रन रन
” १० छिद्धम छिद्रम | द्वितीयः सायकः
” २१ चनुःपटे चनुःपटैः | १० १६ निष्कृष्यतः निष्कृष्यंत
” १० प्रदर्वभव प्रादुर्भाव | १२ ७ शातिनचि शालिनीच
४ ४ ऽयेरादायो ऽयमादयो | ” २१ पुस्तके पुस्तकं
” ६ सिन्यां स्त्रियां | १३ २ भद्रम भद्रम्
५ ११ राघ राद्य | १४ १६ नर्वामतः नवभिर्मतः
६ ६ तयाप्युपायाः तथाप्युपायाः | १५ २ कम्बुगठी कम्बुकण्ठी
” २३ नपाधान नपादान | ” ३ ज्योतीरश ज्योतिरीशः
७ ६ गार्हम्ब गार्हस्थ्य | १६ २ भये भवे-
” ६ रोग्य ? रोग्यः | १७ २४ पुन्राय ग ग पुन्राय
८ १७ इथ य इथ ये | १८ ४ लयचति लक्षयति
” ” कर्मभिरनो ऽर्गभिन्नाः | १९ ८ स्तुरुगय स्तुहगय
” ” निन्दिना निन्दिताः | २० १२ मोदेद्दन्त्रा मोदहन्ती
” २२ पिण्ड पिण्ड | ” २० स्यु इति स्युर्गति
६ २० इतनयो इतरयो | २२ १६ नृांसिम नृसिम
११ ४ नेरिम नेरिम | २३ १५ नमा र समा य
प्रथमः सायक | २४ १ सचन्दन सचन्दन
१ १० वपुष्टः वपुष्टः | ” २० धर्मजनित धर्मजनित
” १४ पाठः पाठः | २८ २ राजिमल राजिमलः
४ ५ पङ्क्तौ क्लृप्त्यन् | ” ३ धर्मजगात्र धर्मजगाज
३ १४ मदगातः मदगति | ” ७ निष्पाफ निष्पाप
५ ८ चरगां चरणे | २५ १२ चङ्गय चक्रय
५ १ भोगान्न भोगान् | ” १५ ” ”
७ २ मुततारा भुजलता | ” १६ देतः दाय
” १० अग्यपन अग्यपन् | २७ ६ रान्रचन्दन रत्नचन्दन
| ” २० नान्निगुदम नानिगुदम्
| ३१ १८ माह माह
| ३३ ५ शिकिनत शिखावल
| ३५ ५ कुणय कुणति