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सर्वकोश
पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 36

३० कुंडलिया
॥ बिस्वास ॥
( ७५ )
लगन महूरत झूठ सब और बिगाडै काम ॥
और बिगाड़ै काम साइत जनि सोधै कोई ।
एक भरोसा नाहिं कुसल कहवाँ से होई ॥
जेकरे हाथै कुसल ताहि को दिया बिसारी ।
आपन इक चतुराई बीच में करै अनारी ॥
तिनका टूटै नाहिं बिना सतगुरु की दाया ।
अजहूँ चेत गँवार जगत है झूठी काया ॥
पलटू सुभ दिन सुभ घड़ी याद पड़े जब नाम ।
लगन महूरत झूठ सब और बिगाड़ै काम ॥
( ७६ )
मोर राम मैं राम का ता से रहौं निसंक ॥
ता से रहौं निसंक तनिक मोर बार ना बाँकै ।
जो कोइ मानै बैर हारि के आपुइ थाकै ॥
दोऊ१ बिधि से राम भार उनके सिर दीन्हा ।
मो पर परै जो गाढ़ राम आपुइ पर लीन्हा ॥
राम भरोसा पाय डेरौं काहू से नाहीं ।
फूल में है ज्यों बास राम हैं हमहीं माहीं ॥
पलटू सब में राम है क्या राजा क्या रंक ।
मोर राम मैं राम का ता से रहौं निसंक ॥
( ७७ )
मगन आपने ख्याल में भाड़ परै संसार ॥
भाड़ परै संसार नाहिं काहू से कामा ।
मन बच करम लगाय जानिहौ केवल रामा ॥
लोक लाज कुल त्यागि जगत की बूझ बड़ाई२ ।
(१) परमार्थ और स्वार्थ दोनों में । (२) दुनिया की बूझ और बड़ाई की हैसियत ।