पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)
Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad
सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपलटू साहिब की बानी भाग—१ २६
जीते जी मरि जाय मुए पर फिर उठि जागै ।
ऐसा जो कोइ होइ सोई इन बातन लागै ॥
पुरजे पुरजे उड़ै अन्न बिनु बस्तर पानी ।
ऐसे पर ठहराय सोई महबूब¹ बखानी ॥
पलटू आपु लुटावही काला मुँह जब होय ।
आसिक का घर दूर है पहुँचै बिरला कोय ॥
( ७३ )
जहाँ तनिक जल बीछुड़ै छोड़ि देतु है प्रान ॥
छोड़ि देतु है प्रान जहाँ जल से बिलगावै ।
देइ दूध में डारि रहै ना प्रान गँवावै ॥
जा को वही अहार ताहि को का लै दीजै ।
रहै ना कोटि उपाय और सुख नाना कीजै ॥
यह लीजै दृष्टान्त सकै सो लेइ बिचारी ।
ऐसो करै सनेह ताहि की मैं बलिहारी ॥
पलट ऐसी प्रीति करु जल और मीन समान ।
जहाँ तनिक जल बीछुड़ै छोड़ि देतु है प्रान ॥
( ७४ )
जो मैं हारौं राम की जो जीतौं तौ राम ॥
जो जीतौं तौ राम राम से तन मन लावौं ।
खेलौं ऐसो खेल लोक की लाज बहावौं ॥
पासा फेंकौं ज्ञान नरद बिस्वास चलावौं ।
चौरासी घर फिरै अड़ी पौबारह नावौं ॥
पौबारह सिरवाय एक घर भीतर राखौं ।
कच्ची मारौं पाँच रैनि दिन सत्रह भाखौं ॥
पलट बाजी लाइहौं दोऊ बिधि से राम ।
जो मैं हारौं राम की जो जीतौं तौ राम ॥
(१) प्रीतम ।