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पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

पलटू साहिब की बानी: प्रथम भाग (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - अमर कुण्डलियाँ व पद)

Paltoo Sahib Ki Bani Part 1: Belvedere Press Allahabad

सन्त पलटू साहिब (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished116 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

२२ कुंडलिया
मीन लिया कोउ मारि ठाँव ढेला चिहराना१ ॥
ऐसी मानुष देह बृथा में जात अनारी ।
भूला कौल करार आप से काम बिगारी ॥
पलट बरस औ मास दिन पहर घड़ी पल छीन ।
ज्यों ज्यों सूखै ताल है त्यों त्यों मीन मलीन ॥
( ५५ )
बूड़ी जात जहाज है नाम निवर्तिक२ बोल ॥
नाम निवर्तिक बोल हाथ से तेरे जाती ।
माँझ धार में फटी सूम की जोगवै थाती ॥
ऐसे मूरख लोग लालच में जनम गँवावैं ।
गई हाथ से चीज तेहू पर लेखा लावैं ॥
कंठा रूँधन भये मोह में लागा अजहूँ ।
कीन्हे प्रान पयान नाम ना सुमिरे तबहूँ ॥
पलटू नर तन रतन सम भा कौड़ी के मोल ।
बूड़ी जात जहाज है नाम निवर्तिक बोल ॥
॥ भक्ति ॥
( ५६ )
एक भक्ति मैं जानौं और झूठ सब बात ॥
और झूठ सब बात करै हठजोग अनारी ।
ब्रह्म दोष वो लेय काया को राखै जारी ॥
प्रान करै आयाम कोई फिर मुद्रा साधै ।
धोती नेती करै कोई लै स्वासा बाँधै ॥
उनमुनि लावै ध्यान करै चौरासी आसन ।
कोई साखी सबद कोइ तप कुस कै डासन ॥
पलटू सब परपंच है करै सो फिर पछितात ।
(१) पानी के सूख जाने पर तलैया की तली फट कर मट्टी के थक्के बन जाते
हैं। (२) बचाने वाला ।